JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2025

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

कथन I: किसी कंपनी में निवेश से प्राप्त प्रतिफल के संबंध में, सामान्यतः बॉण्डधारकों को शेयरधारकों की तुलना में अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला माना जाता है।

कथन II: बॉण्डधारक किसी कंपनी के ऋणदाता होते हैं, जबकि शेयरधारक उसके स्वामी होते हैं।

कथन III: पुनर्भुगतान के प्रयोजन से कोई कंपनी शेयरधारकों की तुलना में बॉण्डधारकों को प्राथमिकता देती है।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?

A.

कथन II और कथन III दोनों सही हैं तथा दोनों कथन I की व्याख्या करते हैं।

B.

कथन I और कथन II दोनों सही हैं तथा कथन I, कथन II की व्याख्या करता है।

C.

कथन II और कथन III में से केवल एक सही है तथा वह कथन I की व्याख्या करता है।

D.

न तो कथन II सही है और न ही कथन III सही है।

Correct Answer: A

Detailed Solution

कथन I सही है। सामान्यतः Bondholders को Stockholders की तुलना में अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला माना जाता है। इसका कारण यह है कि बॉण्ड पर मिलने वाला ब्याज और मूलधन का पुनर्भुगतान संविदात्मक दायित्व होता है, जबकि शेयरधारकों का प्रतिफल कंपनी के लाभ और बाजार-मूल्य पर निर्भर करता है।

यहाँ “कम जोखिम” का अर्थ Risk-free नहीं है। कंपनी के Default करने, ब्याज-दर बदलने या बाजार में बॉण्ड की कीमत घटने से Bondholder को भी हानि हो सकती है।

कथन II सही है और कथन I की व्याख्या करता है। बॉण्ड खरीदने वाला निवेशक कंपनी को ऋण देता है। इसलिए Bondholder कंपनी का Creditor होता है, स्वामी नहीं। उसे सामान्यतः निर्धारित दर से ब्याज और परिपक्वता पर मूलधन प्राप्त करने का अधिकार होता है।

इसके विपरीत, Stockholder कंपनी की Equity Capital में हिस्सा रखता है और उसका आंशिक स्वामी होता है। लाभांश का भुगतान निश्चित नहीं होता। कंपनी लाभांश न देने अथवा लाभ को व्यवसाय में पुनर्निवेश करने का निर्णय ले सकती है।

कथन III भी सही है और कथन I की व्याख्या करता है। कंपनी के Liquidation अथवा Insolvency की स्थिति में ऋणदाताओं के दावों का भुगतान Equity Shareholders से पहले किया जाता है। Shareholders को Residual Claimants कहा जाता है, क्योंकि उन्हें तभी कुछ प्राप्त होता है जब प्राथमिकता वाले दावों का भुगतान करने के बाद कोई राशि शेष बचे।

सरल भुगतान-प्राथमिकता इस प्रकार समझी जा सकती है:

ऋणदाताओं के दावे ⟶ वरीयता अंशधारक ⟶ Equity Shareholders

वास्तविक Insolvency प्रक्रिया में Secured Creditors, Insolvency Costs, कर्मचारियों और सरकारी देयों की प्राथमिकता संबंधित कानून के अनुसार निर्धारित होती है। फिर भी सामान्य सिद्धांत यही है कि Debt Claims को Equity Claims से पहले भुगतान मिलता है।

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