Previous Year Question
भारतीय रिज़र्व बैंक की आय के स्रोत निम्नलिखित में से कौन-से हैं?
I. सरकारी बॉण्डों का क्रय और विक्रय
II. विदेशी मुद्रा का क्रय और विक्रय
III. पेंशन निधि प्रबंधन
IV. निजी कंपनियों को उधार देना
V. करेंसी नोटों का मुद्रण और वितरण
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
केवल I और II
केवल II, III और IV
केवल I, III, IV और V
केवल I, II और V
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन I सही है। भारतीय रिज़र्व बैंक अपने Monetary Policy Operations और सार्वजनिक ऋण प्रबंधन से संबंधित कार्यों के अंतर्गत सरकारी प्रतिभूतियाँ रखता तथा उनका क्रय-विक्रय करता है।
RBI को सरकारी प्रतिभूतियों से Interest Income प्राप्त होती है। Open Market Operations—OMO के अंतर्गत सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद या बिक्री से उत्पन्न Trading Gains भी उसकी आय का भाग बन सकते हैं।
कथन II सही है। RBI देश के Foreign Exchange Reserves का प्रबंधन करता है। विदेशी मुद्रा आस्तियों को विदेशी सरकारी प्रतिभूतियों, केंद्रीय बैंकों और अन्य स्वीकृत साधनों में रखा जाता है। इनसे ब्याज, विनिमय-अंतर तथा प्रतिभूतियों के पुनर्मूल्यांकन अथवा बिक्री से आय प्राप्त हो सकती है।
विदेशी मुद्रा बाजार में RBI रुपए में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए विदेशी मुद्रा का क्रय-विक्रय भी कर सकता है।
कथन III सही नहीं है। पेंशन क्षेत्र का विनियमन Pension Fund Regulatory and Development Authority—PFRDA द्वारा किया जाता है। Pension Funds का वास्तविक प्रबंधन अधिकृत Pension Fund Managers करते हैं। यह RBI की आय अर्जित करने वाली सामान्य गतिविधि नहीं है।
कथन IV सही नहीं है। RBI सामान्य वाणिज्यिक बैंक की तरह निजी कंपनियों को नियमित व्यावसायिक ऋण नहीं देता। यह सरकार का बैंकर, बैंकों का बैंक और अंतिम ऋणदाता है। RBI से बैंकों या वित्तीय संस्थाओं को मिलने वाली Liquidity को निजी कंपनियों को प्रत्यक्ष वाणिज्यिक ऋण देने के समान नहीं माना जा सकता।
कथन V सही है। RBI को भारत में बैंक नोट जारी करने का अधिकार प्राप्त है। मुद्रा जारी करने से मिलने वाले आर्थिक लाभ को Seigniorage कहा जाता है।
इसका अर्थ केवल नोट छापने का शुल्क प्राप्त करना नहीं है। बैंक नोट RBI की ऐसी देयता हैं जिन पर सामान्यतः ब्याज नहीं देना पड़ता, जबकि इनके निर्गम के विरुद्ध रखी गई आस्तियों से RBI आय अर्जित कर सकता है। इस आय में से नोटों के मुद्रण, वितरण और प्रबंधन की लागत घटाई जाती है।