JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2016

Previous Year Question

‘वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद्’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह नीति आयोग का एक अंग है।

  2. इसकी अध्यक्षता संघ का वित्त मंत्री करता है।

  3. यह अर्थव्यवस्था के समष्टि-विवेकपूर्ण पर्यवेक्षण का अनुवीक्षण करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1 और 2

B.

केवल 3

C.

केवल 2 और 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: C

Detailed Solution

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद्—Financial Stability and Development Council (FSDC) भारत की वित्तीय प्रणाली से संबंधित एक शीर्ष-स्तरीय समन्वयकारी मंच है। इसका गठन दिसंबर 2010 में भारत सरकार द्वारा किया गया था।

कथन 1 गलत है। FSDC नीति आयोग का अंग नहीं है। इसका प्रशासनिक संबंध वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग—Department of Economic Affairs से है। यह संसद द्वारा बनाए गए किसी विशेष अधिनियम के अंतर्गत गठित वैधानिक संस्था भी नहीं है; इसका गठन भारत सरकार के कार्यकारी निर्णय द्वारा किया गया था।

कथन 2 सही है। FSDC की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री—Union Finance Minister करते हैं। इसमें वित्तीय क्षेत्र से संबंधित प्रमुख मंत्रालयों, विभागों और नियामक संस्थाओं के प्रतिनिधि सम्मिलित होते हैं।

इसके सदस्यों में सामान्यतः भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर, वित्त सचिव, आर्थिक कार्य विभाग के सचिव तथा SEBI, IRDAI और PFRDA जैसी वित्तीय नियामक संस्थाओं के प्रमुख सम्मिलित होते हैं। आवश्यकता के अनुसार परिषद् की संरचना में संशोधन किया जा सकता है।

कथन 3 सही है। FSDC अर्थव्यवस्था के Macro-prudential Supervision अर्थात् पूरी वित्तीय प्रणाली में उत्पन्न होने वाले व्यापक जोखिमों की निगरानी से संबंधित कार्य करता है।

Macro-prudential Supervision का केंद्र किसी एक बैंक या वित्तीय संस्था की स्थिति नहीं, बल्कि पूरी वित्तीय व्यवस्था की स्थिरता होती है। इसमें निम्नलिखित प्रकार के जोखिम देखे जाते हैं:

  • अनेक वित्तीय संस्थाओं के एक ही प्रकार के जोखिम में फँसने की संभावना;

  • बैंकों, बीमा कंपनियों और पूँजी बाजारों के बीच संक्रमण का जोखिम—Contagion Risk;

  • अत्यधिक ऋण-वृद्धि या Asset-price Bubble;

  • बड़े Financial Conglomerates से उत्पन्न प्रणालीगत जोखिम;

  • किसी वित्तीय संकट के वास्तविक अर्थव्यवस्था तक फैलने की संभावना।

FSDC के अन्य प्रमुख कार्यों में वित्तीय स्थिरता, वित्तीय क्षेत्र के विकास, Inter-regulatory Coordination, वित्तीय समावेशन, वित्तीय साक्षरता और संकट-प्रबंधन से संबंधित समन्वय सम्मिलित हैं।

FSDC की एक उप-समिति भी होती है, जिसे FSDC Sub-Committee कहा जाता है। इसकी अध्यक्षता भारतीय रिज़र्व बैंक का गवर्नर करता है। यह परिषद् के कार्यों से संबंधित परिचालन और अंतर-नियामकीय विषयों पर विचार करती है।

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