Previous Year Question
वर्ष 1991 में अपनी आर्थिक नीतियों के उदारीकरण के बाद भारत में निम्नलिखित में से क्या घटित हुआ है?
सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का अंश बहुत अधिक बढ़ गया।
विश्व व्यापार में भारत के निर्यात का अंश बढ़ गया।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का अंतर्वाह बढ़ गया।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बहुत अधिक बढ़ गया।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
केवल 1 और 4
केवल 2, 3 और 4
केवल 2 और 3
1, 2, 3 और 4
Correct Answer: B
Detailed Solution
वर्ष 1991 में भारत ने भुगतान-संतुलन संकट के बाद नई आर्थिक नीति अपनाई। इसके तीन प्रमुख आयाम उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण थे। औद्योगिक लाइसेंसिंग में कमी, व्यापार अवरोधों में कटौती, विनिमय दर संबंधी सुधार तथा विदेशी निवेश के लिए अर्थव्यवस्था को खोलना इसके महत्त्वपूर्ण भाग थे।
कथन 1 गलत है। आर्थिक उदारीकरण के बाद सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का प्रतिशत अंश बहुत अधिक नहीं बढ़ा, बल्कि दीर्घकाल में घटा। इसका अर्थ कृषि उत्पादन में अनिवार्य रूप से गिरावट नहीं है; इसका मुख्य कारण उद्योग और विशेषकर सेवा क्षेत्र का कृषि की तुलना में अधिक तेज गति से बढ़ना है।
वर्ष 1990-91 के आसपास कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का भारतीय अर्थव्यवस्था में अंश लगभग 29% के निकट था, जो 2010 के दशक के मध्य तक घटकर लगभग 17-18% रह गया। इसे अर्थव्यवस्था का संरचनात्मक परिवर्तन कहा जाता है। हालांकि, कृषि का रोजगार और ग्रामीण आजीविका में योगदान उसके GDP अंश की तुलना में काफी अधिक बना रहा।
कथन 2 सही है। व्यापार उदारीकरण, आयात-शुल्क में कमी, निर्यात-प्रोत्साहन, विनिमय दर में सुधार और भारतीय उत्पादकों के वैश्विक बाजार से जुड़ने के कारण विश्व व्यापार में भारत के निर्यात का अंश बढ़ा।
वर्ष 1990 के आसपास विश्व के वस्तु निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग आधा प्रतिशत थी। 2010 के दशक के मध्य तक यह बढ़कर लगभग 1.6-1.7% के आसपास पहुँच गई। वस्तुओं के साथ-साथ सॉफ्टवेयर और अन्य व्यावसायिक सेवाओं के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
कथन 3 सही है। वर्ष 1991 के बाद अनेक क्षेत्रों को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खोला गया। कई क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग की अनुमति दी गई, विदेशी स्वामित्व की सीमा बढ़ाई गई और विदेशी मुद्रा प्रबंधन व्यवस्था को उदार बनाया गया।
इसके परिणामस्वरूप FDI अंतर्वाह शुरुआती 1990 के दशक के अत्यंत निम्न स्तर से बढ़कर 2010 के दशक में प्रतिवर्ष कई दसियों अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। FDI केवल पूँजी ही नहीं लाता; इसके साथ प्रौद्योगिकी, प्रबंधन-कौशल, उत्पादन-पद्धतियाँ और वैश्विक बाजारों तक पहुँच भी आ सकती है।
कथन 4 सही है। वर्ष 1991 के भुगतान-संतुलन संकट के समय भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम रह गया था कि वह लगभग दो सप्ताह के आयात को ही पूरा कर सकता था। जनवरी 1991 में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ लगभग 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास रह गई थीं।
उदारीकरण के बाद निर्यात, सेवा-प्राप्तियों, विदेशी निवेश, प्रवासी भारतीय जमाओं और पूँजी प्रवाह में वृद्धि के कारण विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से बढ़ा। वर्ष 2017 के आसपास भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 350 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका था।
विदेशी मुद्रा भंडार में मुख्यतः विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ, स्वर्ण, विशेष आहरण अधिकार—SDR और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में रिज़र्व ट्रेंच की स्थिति सम्मिलित होती है।