JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ECONOMY · 2020

Previous Year Question

वर्ष 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. शहरी क्षेत्रों में कामगार उत्पादकता (वर्ष 2004-05 की कीमतों पर ₹ प्रति कामगार) बढ़ी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसमें कमी हुई।

  2. कार्यबल में ग्रामीण क्षेत्रों का प्रतिशत अंश लगातार बढ़ा।

  3. ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि अर्थव्यवस्था में वृद्धि हुई।

  4. ग्रामीण रोज़गार की वृद्धि दर में कमी आई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A.

केवल 1 और 2

B.

केवल 3 और 4

C.

केवल 3

D.

केवल 1, 2 और 4

Correct Answer: B

Detailed Solution

वर्ष 1991 के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक उदारीकरण, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विविधीकरण की प्रक्रिया तेज हुई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब केवल कृषि पर आधारित नहीं रही; इसमें निर्माण, विनिर्माण, व्यापार, परिवहन और अन्य सेवाओं का महत्त्व बढ़ा।

कथन 1 गलत है। आर्थिक उदारीकरण के बाद कामगार उत्पादकता में केवल शहरी क्षेत्रों में ही वृद्धि नहीं हुई, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी वृद्धि हुई। ग्रामीण उत्पादकता का स्तर शहरी उत्पादकता की तुलना में कम हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि ग्रामीण कामगार उत्पादकता में कमी हुई।

कामगार उत्पादकता का सामान्य अर्थ प्रत्येक कामगार द्वारा उत्पन्न वास्तविक उत्पादन अथवा सकल मूल्यवर्धन है। इसे निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:

ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि तकनीक, सिंचाई, मशीनीकरण, ग्रामीण सड़कें, संचार, निर्माण और गैर-कृषि गतिविधियों के विस्तार ने प्रति कामगार उत्पादन बढ़ाने में योगदान दिया।

कथन 2 गलत है। देश के कुल कार्यबल में ग्रामीण क्षेत्रों का प्रतिशत अंश लगातार नहीं बढ़ा। शहरीकरण, ग्रामीण-शहरी प्रवास और शहरों में उद्योग तथा सेवा क्षेत्र के विस्तार के कारण कुल कार्यबल में ग्रामीण हिस्सेदारी की दीर्घकालीन प्रवृत्ति घटने की रही है।

इसके अतिरिक्त, कृषि में आवश्यकता से अधिक श्रमिकों की उपस्थिति तथा कम आय ने श्रमिकों को निर्माण, विनिर्माण, परिवहन, व्यापार और शहरी सेवाओं की ओर जाने के लिए प्रेरित किया।

कथन 3 सही है। उदारीकरण के बाद ग्रामीण गैर-कृषि अर्थव्यवस्था का विस्तार हुआ। ग्रामीण गैर-कृषि अर्थव्यवस्था में कृषि के अतिरिक्त आय और रोज़गार प्रदान करने वाली गतिविधियाँ सम्मिलित होती हैं, जैसे:

  • निर्माण;

  • ग्रामीण विनिर्माण और प्रसंस्करण;

  • व्यापार तथा मरम्मत सेवाएँ;

  • परिवहन और भंडारण;

  • शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य सेवाएँ;

  • स्वरोज़गार तथा लघु उद्यम।

ग्रामीण सड़कों, बिजली, संचार, बाजार-संपर्क और शहरी क्षेत्रों से बढ़ते आर्थिक संबंधों ने ग्रामीण गैर-कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया। विशेष रूप से निर्माण क्षेत्र ग्रामीण कृषि से बाहर आने वाले श्रमिकों के लिए रोज़गार का महत्त्वपूर्ण स्रोत बना।

कथन 4 सही है। ग्रामीण रोज़गार की वृद्धि दर में कमी आई। ग्रामीण उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि होने के बावजूद रोज़गार उसी गति से नहीं बढ़ा। कृषि में मशीनीकरण, जोतों का छोटा होना, कृषि में सीमित श्रम-अवशोषण तथा रोजगारविहीन या कम रोजगार-सृजक वृद्धि इसके प्रमुख कारण रहे।

ग्रामीण कार्यबल का कृषि से गैर-कृषि गतिविधियों की ओर स्थानांतरण हुआ, लेकिन गैर-कृषि क्षेत्र में उत्पन्न रोजगार कृषि से बाहर आने वाले सभी श्रमिकों को समाहित करने के लिए पर्याप्त नहीं था। इससे ग्रामीण रोजगार-वृद्धि की दर कमजोर हुई।

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