Previous Year Question
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, ‘संपार्श्विक उधार और ऋण दायित्व’ निम्नलिखित में से किसके साधन हैं?
बॉण्ड बाज़ार
विदेशी मुद्रा बाज़ार
मुद्रा बाज़ार
शेयर बाज़ार
Correct Answer: C
Detailed Solution
‘संपार्श्विक उधार और ऋण दायित्व’ अर्थात् Collateralised Borrowing and Lending Obligation—CBLO, मुद्रा बाज़ार का एक संपार्श्विकीकृत साधन था। इसे बाजार सहभागियों के बीच अल्पकालीन धन के उधार और ऋण देने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया था।
मुद्रा बाजार में सामान्यतः एक वर्ष तक की अवधि वाले अल्पकालीन धन और अत्यधिक तरल वित्तीय साधनों का लेन-देन होता है। ट्रेजरी बिल, वाणिज्यिक पत्र, जमा प्रमाणपत्र, कॉल/नोटिस मनी, रेपो और ट्राई-पार्टी रेपो इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
CBLO की प्रमुख विशेषताएँ थीं:
इसके अंतर्गत उधार लेने वाला सहभागी पात्र प्रतिभूतियों, मुख्यतः सरकारी प्रतिभूतियों, को संपार्श्विक के रूप में रखता था।
यह अल्पकालीन धन उधार लेने और अधिशेष धन का निवेश करने की सुविधा देता था।
इसका लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक बुक-एंट्री प्रणाली के माध्यम से किया जाता था।
इसके संचालन और निपटान में भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड—CCIL की प्रमुख भूमिका थी।
संपार्श्विक उपलब्ध होने के कारण असंपार्श्विक कॉल मनी की तुलना में ऋणदाता का प्रतिपक्ष और ऋण जोखिम सीमित हो जाता था।
वर्तमान स्थिति: भारतीय रिज़र्व बैंक के विनियामक परिवर्तन के बाद CBLO को 5 नवंबर 2018 से ट्राई-पार्टी रेपो—TREPS द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया। इस परिवर्तन से इसकी मूल आर्थिक प्रकृति नहीं बदलती—CBLO मुद्रा बाजार का ही साधन था।
यह बॉण्ड बाजार का साधन नहीं था, क्योंकि बॉण्ड बाजार मुख्यतः मध्यम और दीर्घकालीन ऋण प्रतिभूतियों से संबंधित है। यह विदेशी मुद्रा बाजार या शेयर बाजार का भी साधन नहीं था।