Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: चक्रीय अर्थव्यवस्था ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करती है।
कथन II: चक्रीय अर्थव्यवस्था निविष्टियों के रूप में कच्चे माल के उपयोग को कम करती है।
कथन III: चक्रीय अर्थव्यवस्था उत्पादन प्रक्रिया में अपव्यय को कम करती है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
कथन II और कथन III दोनों सही हैं और दोनों कथन I की व्याख्या करते हैं
कथन II और कथन III दोनों सही हैं, किंतु उनमें से केवल एक कथन I की व्याख्या करता है
कथन II और कथन III में से केवल एक सही है और वही कथन I की व्याख्या करता है
न तो कथन II, न ही कथन III सही है
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन I सही है। चक्रीय अर्थव्यवस्था में उत्पादों और सामग्रियों को अधिक समय तक आर्थिक उपयोग में बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। इसमें संसाधनों को निकालने, उनका उपयोग करने और अपशिष्ट के रूप में फेंक देने वाले परंपरागत रैखिक मॉडल—Take, Make and Dispose—के स्थान पर पुनः उपयोग, मरम्मत, नवीनीकरण, पुनर्विनिर्माण और पुनर्चक्रण को अपनाया जाता है।
इससे नए कच्चे माल के निष्कर्षण, प्रसंस्करण और परिवहन की आवश्यकता कम होती है। ये गतिविधियाँ सामान्यतः ऊर्जा-प्रधान होती हैं और इनके दौरान कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। इसलिए चक्रीय अर्थव्यवस्था ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में सहायक होती है।
कथन II सही है और कथन I की व्याख्या करता है। पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण से पहले से आर्थिक व्यवस्था में उपलब्ध सामग्री को पुनः उत्पादन में लगाया जाता है। इससे खनिजों, धातुओं, लकड़ी और जीवाश्म ईंधन जैसे प्राथमिक या नए कच्चे माल की माँग कम होती है।
कच्चे माल का निष्कर्षण और प्राथमिक प्रसंस्करण कम होने पर खनन, विनिर्माण तथा परिवहन से होने वाला ऊर्जा-उपयोग और उत्सर्जन भी कम होता है। इसलिए कथन II, कथन I में दिए गए उत्सर्जन में कमी के कारणों में से एक है।
कथन III भी सही है और कथन I की व्याख्या करता है। चक्रीय अर्थव्यवस्था उत्पादन प्रक्रिया में बेहतर डिजाइन, संसाधन-दक्षता और उप-उत्पादों के पुनः उपयोग द्वारा अपव्यय को कम करती है।
उत्पादन और उपभोग से उत्पन्न अपशिष्ट कम होने पर लैंडफिल, अपशिष्ट-दहन और नई प्रतिस्थापन सामग्री के उत्पादन की आवश्यकता भी घटती है। इससे मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।
चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख उपायों में शामिल हैं:
उत्पादों को अधिक टिकाऊ तथा मरम्मत योग्य बनाना।
पुनः उपयोग और साझा उपयोग को प्रोत्साहित करना।
पुराने उत्पादों का नवीनीकरण और पुनर्विनिर्माण करना।
उत्पादन-अवशेषों को दूसरे उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में प्रयोग करना।
उत्पादक को उत्पाद के उपयोग के बाद उसके संग्रह और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी देना, जिसे विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व—EPR कहते हैं।
भारत में ई-अपशिष्ट, प्लास्टिक अपशिष्ट, प्रयुक्त टायर, अपशिष्ट तेल और बैटरियों के लिए EPR आधारित व्यवस्थाएँ चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।