Previous Year Question
‘बेनामी संपत्ति संव्यवहार प्रतिषेध अधिनियम, 1988 (PBPT अधिनियम)’ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
यदि संपत्ति का स्वामी संव्यवहार से अवगत नहीं है, तो संपत्ति संव्यवहार को बेनामी संव्यवहार नहीं माना जाता है।
बेनामी रूप में धारित संपत्तियाँ सरकार द्वारा अधिहरण के लिए दायी हैं।
अधिनियम में जाँच के लिए तीन प्राधिकारियों का उपबंध है किंतु किसी अपीलीय क्रियाविधि का उपबंध नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 3
2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 सही नहीं है। बेनामी संपत्ति संव्यवहार प्रतिषेध अधिनियम की धारा 2(9) में विभिन्न प्रकार के बेनामी संव्यवहारों को परिभाषित किया गया है। इसमें वह संव्यवहार भी बेनामी माना जाता है जिसमें संपत्ति के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजों में उल्लिखित व्यक्ति ऐसे स्वामित्व से अनभिज्ञ हो या संपत्ति के स्वामित्व से इनकार कर दे।
इसलिए संपत्ति का अभिलिखित स्वामी संव्यवहार से अनभिज्ञ है, तो केवल इस कारण संव्यवहार बेनामी की परिभाषा से बाहर नहीं हो जाता। कुछ परिस्थितियों में यही अनभिज्ञता संव्यवहार को बेनामी मानने का आधार बन सकती है।
कथन 2 सही है। अधिनियम की धारा 5 के अनुसार बेनामी रूप में धारित संपत्ति केंद्र सरकार द्वारा अधिहरण के लिए दायी होती है। अधिहरण के लिए सामान्यतः कोई प्रतिकर देय नहीं होता। हालाँकि, संपत्ति को अधिहृत करने से पहले अधिनियम में निर्धारित जाँच, अनंतिम कुर्की और न्यायनिर्णयन की प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
कथन 3 सही नहीं है। अधिनियम की धारा 18 के अंतर्गत चार प्रमुख प्राधिकरण निर्धारित किए गए हैं:
आरंभकर्ता अधिकारी
अनुमोदन प्राधिकारी
प्रशासक
न्यायनिर्णायक प्राधिकारी
अतः यह कहना गलत है कि अधिनियम केवल तीन जाँच प्राधिकारियों का उपबंध करता है।
इसके अतिरिक्त अधिनियम में अपीलीय व्यवस्था भी मौजूद है। न्यायनिर्णायक प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपीलीय अधिकरण में अपील की जा सकती है। अपीलीय अधिकरण के निर्णय के विरुद्ध कानून के प्रश्न पर उच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान भी है। इसलिए कथन 3 दोनों आधारों पर गलत है।
अधिनियम को मूलतः बेनामी संव्यवहार (प्रतिषेध) अधिनियम, 1988 कहा जाता था। वर्ष 2016 के संशोधन द्वारा इसका नाम बदलकर बेनामी संपत्ति संव्यवहार प्रतिषेध अधिनियम, 1988 किया गया और जाँच, कुर्की, न्यायनिर्णयन तथा अधिहरण संबंधी विस्तृत व्यवस्था जोड़ी गई।