Previous Year Question
भारत में, दूरसंचार, बीमा, विद्युत आदि जैसे क्षेत्रों में स्वतंत्र नियामकों की समीक्षा निम्नलिखित में से कौन करते हैं?
संसद द्वारा गठित तदर्थ समितियाँ
विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियाँ
वित्त आयोग
वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग
नीति आयोग
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
1 और 2
1, 3 और 4
3, 4 और 5
2 और 5
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन 1 सही है। संसद किसी विशेष विषय, घोटाले, प्रशासनिक समस्या अथवा नियामक संस्था के कार्यकरण की जाँच के लिए तदर्थ समिति गठित कर सकती है। ऐसी समिति अपने निर्धारित कार्य को पूरा करने और प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बाद समाप्त हो जाती है।
उदाहरण के लिए किसी विशिष्ट क्षेत्र की नीतियों, लाइसेंस आवंटन, प्रशासनिक निर्णयों या नियामक विफलताओं की जाँच के लिए संयुक्त संसदीय समिति अथवा अन्य तदर्थ समिति गठित की जा सकती है। इसलिए तदर्थ समितियाँ स्वतंत्र नियामकों के कार्यकरण की समीक्षा कर सकती हैं।
कथन 2 सही है। विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियाँ संबंधित मंत्रालयों और उनके अधीन आने वाली संस्थाओं एवं नियामकों के कार्यकरण की समीक्षा करती हैं। वे सामान्यतः:
अनुदान की माँगों,
संबंधित विधेयकों,
मंत्रालयों की वार्षिक रिपोर्टों और
दीर्घकालिक नीति-दस्तावेजों
की जाँच करती हैं।
उदाहरणतः संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित संसदीय समिति दूरसंचार विभाग तथा TRAI से जुड़े विषयों की समीक्षा कर सकती है। इसी प्रकार वित्त और ऊर्जा से संबंधित समितियाँ बीमा एवं विद्युत क्षेत्र के नियामकीय विषयों की जाँच कर सकती हैं।
कथन 3 सही नहीं है। वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित संवैधानिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच कर-राजस्व के वितरण, राज्यों को सहायता अनुदान तथा स्थानीय निकायों के संसाधनों से संबंधित सिफारिशें करना है। यह दूरसंचार, बीमा या विद्युत नियामकों की संसदीय समीक्षा नहीं करता।
कथन 4 सही नहीं है। वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग का गठन वित्तीय क्षेत्र से संबंधित कानूनों और संस्थागत ढाँचे की समीक्षा करने के लिए किया गया था। यह स्वतंत्र नियामकों की नियमित संसदीय समीक्षा करने वाला स्थायी निकाय नहीं था। इसके अतिरिक्त इसका कार्यक्षेत्र सामान्य रूप से दूरसंचार और विद्युत जैसे सभी क्षेत्रों तक विस्तारित नहीं था।
कथन 5 सही नहीं है। नीति आयोग सरकार का नीति-विचार एवं सहकारी संघवाद संबंधी संस्थान है। वह सरकार को नीतिगत सुझाव दे सकता है, लेकिन स्वतंत्र नियामकों की संसदीय जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला समीक्षा प्राधिकरण नहीं है।