JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2019

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारतीय वन अधिनियम, 1927 में हुए हाल के संशोधन के अनुसार, वनवासियों को वन क्षेत्रों में उगे बाँस को काटने का अधिकार है।

  2. अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के अनुसार बाँस एक लघु वनोपज है।

  3. अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 वनवासियों को लघु वनोपज के स्वामित्व की अनुमति देता है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

1 और 2

B.

2 और 3

C.

केवल 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन 1 सही नहीं है। भारतीय वन (संशोधन) अधिनियम, 2017 द्वारा भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 2(7) में संशोधन करके बाँस को “वृक्ष” की परिभाषा से बाहर किया गया था। लेकिन यह छूट मुख्यतः गैर-वन क्षेत्रों में उगाए गए बाँस पर लागू होती है।

इस संशोधन का उद्देश्य गैर-वन भूमि पर बाँस उगाने वाले किसानों को बाँस काटने और उसके परिवहन के लिए वन विभाग की कटाई एवं पारगमन अनुमति से राहत देना था। वन क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगे बाँस की स्थिति अलग है। वनवासियों को केवल इस संशोधन के आधार पर वन क्षेत्रों में उगा बाँस काटने का सामान्य एवं असीमित अधिकार नहीं मिला। इसलिए कथन 1 गलत है।

कथन 2 सही है। वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 2(i) में “लघु वनोपज” की परिभाषा में बाँस को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत बाँस के अतिरिक्त झाड़-झंखाड़, ठूँठ, बेंत, तसर कोकून, शहद, मोम, लाख, तेंदू या केंदू पत्ते, औषधीय पौधे, जड़ी-बूटियाँ, जड़ें और कंद जैसी गैर-काष्ठ वनोपज शामिल हैं।

कथन 3 सही है। वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(c) पात्र वन निवासी अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों को परंपरागत रूप से एकत्र की जाने वाली लघु वनोपज पर:

  • स्वामित्व,

  • उसे प्राप्त करने,

  • एकत्र करने,

  • उपयोग करने और

  • उसका निपटान करने

का अधिकार प्रदान करती है।

यह अधिकार गाँव की सीमा के भीतर अथवा बाहर परंपरागत रूप से एकत्र की जाने वाली लघु वनोपज पर लागू हो सकता है। इसलिए पात्र वन अधिकार धारक बाँस जैसी लघु वनोपज को एकत्र करके उसका उपयोग अथवा विक्रय कर सकते हैं, लेकिन यह अधिकार वन अधिकार अधिनियम और लागू संरक्षण नियमों के अधीन रहता है।

यहाँ दोनों कानूनों में अंतर समझना आवश्यक है: भारतीय वन अधिनियम का 2017 का संशोधन गैर-वन भूमि पर बाँस की कटाई और परिवहन को सरल बनाता है, जबकि वन अधिकार अधिनियम पात्र वन समुदायों को लघु वनोपज पर सामुदायिक एवं आजीविका-संबंधी अधिकार प्रदान करता है।

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