JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2020

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. आधार मेटाडेटा को तीन माह से अधिक संग्रहित नहीं रखा जा सकता।

  2. राज्य आधार डेटा को साझा करने के लिए निजी निगमों के साथ कोई संविदा नहीं कर सकता।

  3. बीमा उत्पाद प्राप्त करने के लिए आधार अनिवार्य है।

  4. भारत की संचित निधि से निधि प्राप्त करने वाले हितलाभों को पाने के लिए आधार अनिवार्य है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1 और 4

B.

केवल 2 और 4

C.

केवल 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन 1 सही नहीं है। आधार प्रमाणीकरण से संबंधित डेटा को अधिकतम तीन माह तक रखने का नियम नहीं था। आधार प्रमाणीकरण विनियमों में प्रमाणीकरण लेन-देन संबंधी डेटा के लिए छह माह की अवधि निर्धारित थी। इसलिए कथन में दी गई तीन माह की सीमा गलत है।

आधार अधिनियम में मूल बायोमेट्रिक सूचना—Core Biometric Information और अन्य पहचान-संबंधी सूचनाओं में अंतर किया गया है। मूल बायोमेट्रिक सूचना में उँगलियों के निशान, आँखों की पुतली का स्कैन तथा विनियमों द्वारा निर्धारित अन्य जैविक विशेषताएँ आती हैं। इन्हें सामान्य रूप से किसी व्यक्ति या संस्था के साथ साझा नहीं किया जा सकता।

कथन 2 सही है। सर्वोच्च न्यायालय ने के.एस. पुट्टस्वामी (आधार) निर्णय, 2018 में आधार अधिनियम की धारा 57 के उस भाग को असंवैधानिक घोषित किया था, जो किसी व्यक्ति और निजी निगम के बीच संविदा के आधार पर निजी संस्थाओं को आधार के उपयोग की अनुमति देता था। आधार डेटा के साझाकरण पर अधिनियम की धाराएँ 28 और 29 भी प्रतिबंध लगाती हैं। अतः प्रश्न के संदर्भ में निजी निगमों के साथ संविदा करके आधार डेटा साझा नहीं किया जा सकता।

कथन 3 सही नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद बीमा उत्पाद खरीदने के लिए आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। कोई व्यक्ति स्वीकृत वैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत स्वेच्छा से आधार का उपयोग कर सकता है, लेकिन बीमा उत्पाद प्राप्त करने की सामान्य अनिवार्य शर्त के रूप में इसे लागू नहीं किया जा सकता।

कथन 4 सही है। आधार अधिनियम की धारा 7 के अनुसार केंद्र या राज्य सरकार किसी ऐसी सब्सिडी, लाभ या सेवा के लिए आधार संख्या प्रस्तुत करने की शर्त निर्धारित कर सकती है, जिसका व्यय भारत की संचित निधि अथवा किसी राज्य की संचित निधि से किया जाता है।

हालाँकि, जिस व्यक्ति को अभी आधार संख्या नहीं मिली है, उसे आधार नामांकन के लिए आवेदन करने का अवसर तथा संख्या मिलने तक वैकल्पिक पहचान-साधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। केवल आधार संख्या न होने के कारण पात्र व्यक्ति को लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

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