JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2023

Previous Year Question

सारतः, ‘विधि की सम्यक् प्रक्रिया’ का क्या अर्थ है?

A.

नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत

B.

विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया

C.

विधि का निष्पक्ष अनुप्रयोग

D.

विधि के समक्ष समता

Correct Answer: C

Detailed Solution

‘विधि की सम्यक् प्रक्रिया’ का सार यह है कि राज्य द्वारा बनाया गया कानून और उसे लागू करने की प्रक्रिया दोनों न्यायसंगत, निष्पक्ष और युक्तियुक्त हों। इसलिए दिए गए विकल्पों में विधि का निष्पक्ष अनुप्रयोग इसका सर्वाधिक उपयुक्त अर्थ है।

Due Process of Law सरकारी कार्रवाई की दो स्तरों पर समीक्षा की अनुमति देता है:

  1. प्रक्रियात्मक सम्यक् प्रक्रिया: किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई से पहले निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई गई है या नहीं। इसमें सूचना देना, सुनवाई का उचित अवसर और निष्पक्ष निर्णायक जैसे तत्त्व सम्मिलित हैं।

  2. तात्त्विक सम्यक् प्रक्रिया: कानून का विषय और उसकी मूल सामग्री स्वयं न्यायसंगत, युक्तियुक्त तथा गैर-मनमानी है या नहीं।

‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ से अंतर

भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है।

‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ का संकीर्ण अर्थ यह हो सकता है कि यदि सक्षम विधायिका ने कोई कानून बनाया है और सरकार ने उसमें निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है, तो कार्रवाई वैध होगी। इसमें कानून की मूल न्यायसंगतता की अलग जाँच आवश्यक नहीं मानी जाती।

इसके विपरीत ‘विधि की सम्यक् प्रक्रिया’ में न्यायालय यह भी देख सकता है कि:

  • कानून मनमाना तो नहीं है।

  • प्रक्रिया न्यायसंगत और युक्तियुक्त है या नहीं।

  • व्यक्ति को सुनवाई का वास्तविक अवसर मिला या नहीं।

  • सरकारी कार्रवाई अधिकारों पर असंगत प्रतिबंध तो नहीं लगाती।

  • कानून और उसका अनुप्रयोग दोनों निष्पक्ष हैं या नहीं।

भारतीय संवैधानिक स्थिति

प्रारंभिक निर्णय ए.के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की अपेक्षाकृत संकीर्ण व्याख्या की थी।

बाद में मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया न्यायसंगत, उचित और युक्तियुक्त होनी चाहिए; वह मनमानी, काल्पनिक या दमनकारी नहीं हो सकती।

न्यायालय ने अनुच्छेद 14, 19 और 21 को परस्पर संबंधित माना। इससे भारतीय संवैधानिक कानून में अनुच्छेद 21 की व्याख्या सम्यक् प्रक्रिया के अत्यंत निकट आ गई।

इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गरिमापूर्ण जीवन, विधिक सहायता, त्वरित विचारण, आजीविका, स्वच्छ पर्यावरण और निजता जैसे अनेक अधिकारों को मान्यता दी।

अन्य विकल्पों का परीक्षण

विकल्प (a): नैसर्गिक न्याय सम्यक् प्रक्रिया का महत्त्वपूर्ण भाग है। इसमें मुख्यतः किसी को बिना सुनवाई दंडित न करना और किसी व्यक्ति का अपने ही मामले में न्यायाधीश न होना शामिल है। लेकिन Due Process केवल नैसर्गिक न्याय तक सीमित नहीं है।

विकल्प (b): विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया और Due Process समान नहीं हैं। Due Process कानून की विषयवस्तु और उसके अनुप्रयोग की निष्पक्षता की भी जाँच करता है।

विकल्प (d): विधि के समक्ष समता अनुच्छेद 14 का सिद्धांत है। यह सम्यक् प्रक्रिया से संबंधित है, लेकिन उसका संपूर्ण अर्थ नहीं है।

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