Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक किसी देश के ‘संविधान’ के मुख्य उद्देश्य को सर्वोत्तम रूप से प्रतिबिंबित करता है?
यह आवश्यक विधियों के निर्माण हेतु उद्देश्यों का निर्धारण करता है।
यह राजनीतिक पदों और सरकार के सृजन को सुकर बनाता है।
यह सरकार की शक्तियों को परिभाषित और परिसीमित करता है।
यह सामाजिक न्याय, सामाजिक समता और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।
Correct Answer: C
Detailed Solution
किसी संविधान का मुख्य उद्देश्य सरकार की संस्थाओं की स्थापना करना, उनकी शक्तियों का वितरण करना और उन शक्तियों पर सीमाएँ निर्धारित करना है। इसलिए विकल्प (c) संविधान के मूल प्रयोजन को सबसे व्यापक और सटीक रूप में व्यक्त करता है।
शक्तियों को परिभाषित करना
भारत का संविधान शासन की प्रमुख संस्थाओं का गठन और उनकी शक्तियों का निर्धारण करता है:
अनुच्छेद 52 में राष्ट्रपति के पद की व्यवस्था है।
अनुच्छेद 74 में राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का प्रावधान है।
अनुच्छेद 79 संसद की संरचना निर्धारित करता है।
अनुच्छेद 124 उच्चतम न्यायालय की स्थापना से संबंधित है।
अनुच्छेद 153 राज्यों में राज्यपाल के पद की व्यवस्था करता है।
अनुच्छेद 168 राज्य विधानमंडलों की संरचना से संबंधित है।
अनुच्छेद 214 राज्यों के लिए उच्च न्यायालयों की व्यवस्था करता है।
इस प्रकार संविधान यह निर्धारित करता है कि शासन कौन करेगा, किस संस्था को कौन-सी शक्ति मिलेगी और वह शक्ति किस प्रक्रिया से प्रयोग की जाएगी।
सरकारी शक्तियों को सीमित करना
संविधान सरकार को शक्तियाँ प्रदान करने के साथ उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए सीमाएँ भी लगाता है। इसके प्रमुख साधन हैं:
मूल अधिकार: राज्य की कार्रवाई के विरुद्ध व्यक्ति की स्वतंत्रताओं की रक्षा करते हैं।
न्यायिक पुनर्विलोकन: न्यायालय असंवैधानिक कानूनों और सरकारी कार्रवाइयों को निरस्त कर सकते हैं।
शक्तियों का कार्यात्मक विभाजन: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के कार्यक्षेत्र अलग किए गए हैं।
संघवाद: विधायी और कार्यपालिका शक्तियाँ संघ और राज्यों के बीच बाँटी गई हैं।
कानून का शासन: सरकार की प्रत्येक कार्रवाई संविधान और कानून के अधीन होती है।
संसदीय उत्तरदायित्व: मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएँ: निर्वाचन आयोग तथा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक जैसी संस्थाएँ सरकारी शक्ति पर संस्थागत नियंत्रण प्रदान करती हैं।
अन्य विकल्प मुख्य उद्देश्य क्यों नहीं हैं?
विकल्प (a): संविधान विधि-निर्माण की शक्तियाँ और सीमाएँ निर्धारित करता है, लेकिन प्रत्येक आवश्यक कानून का विशिष्ट उद्देश्य संविधान तय नहीं करता। संसद और विधानमंडल अपनी संवैधानिक क्षमता के भीतर कानूनों के उद्देश्य निर्धारित करते हैं।
विकल्प (b): संविधान राजनीतिक पदों और सरकार की संस्थाओं का निर्माण करता है, लेकिन केवल संस्थाओं का निर्माण उसका पूर्ण मुख्य प्रयोजन नहीं है। उन संस्थाओं की शक्तियों को सीमित करना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।
विकल्प (d): सामाजिक न्याय, समता और सुरक्षा भारतीय संविधान के महत्त्वपूर्ण लक्ष्य हैं। प्रस्तावना, मूल अधिकार और राज्य के नीति-निदेशक तत्त्व इन्हें बढ़ावा देते हैं। फिर भी सभी देशों के संविधानों का सार्वभौमिक मुख्य प्रयोजन शासन की संरचना और उसकी शक्तियों की सीमाएँ निर्धारित करना है।
संविधानवाद
संविधान और संविधानवाद में अंतर है। संविधान शासन की मूल संस्थाओं और नियमों का लिखित अथवा अलिखित ढाँचा हो सकता है। संविधानवाद का अर्थ है कि सरकार की शक्ति सीमित हो, अधिकार सुरक्षित हों और शासन मनमाना न हो।