Previous Year Question
भारत के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
कार्रवाई | वह अधिनियम जिसके अधीन वह आती है |
1. पुलिस या सैनिक वर्दी को अनधिकृत रूप से पहनना | शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 |
2. किसी पुलिस अधिकारी या सैनिक अधिकारी को, जब वह अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लगा हुआ हो, जानबूझकर गुमराह करना या अन्यथा हस्तक्षेप करना | भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 |
3. जश्न मनाने के लिए गोली चलाना, जिससे दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है | आयुध (संशोधन) अधिनियम, 2019 |
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
कोई भी नहीं
Correct Answer: D
Detailed Solution
युग्म 1 सही है
शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 की धारा 6 पुलिस या सशस्त्र बलों की वर्दी के अनधिकृत उपयोग तथा इससे संबंधित मिथ्या प्रतिरूपण जैसे अपराधों से संबंधित है।
यदि कोई व्यक्ति किसी निषिद्ध स्थान में प्रवेश प्राप्त करने, किसी अन्य व्यक्ति की सहायता करने अथवा राज्य की सुरक्षा के विरुद्ध किसी उद्देश्य से बिना वैध प्राधिकार के ऐसी वर्दी पहनता या उसका उपयोग करता है, जो पुलिस अथवा सशस्त्र बलों की वर्दी से मिलती-जुलती हो, तो वह अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय हो सकता है।
धारा 6 में आधिकारिक रिपोर्टों का मिथ्याकरण, जालसाजी, दूसरे व्यक्ति का प्रतिरूपण और मिथ्या दस्तावेजों का उपयोग भी शामिल है।
युग्म 2 गलत है
कर्तव्य का निर्वहन कर रहे पुलिस अधिकारी या सशस्त्र बल के सदस्य को जानबूझकर गुमराह करना या उसके कार्य में हस्तक्षेप करना भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के अंतर्गत नहीं आता।
यह अपराध शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 की धारा 7 के अंतर्गत आता है। यह धारा निषिद्ध स्थान के निकट पुलिस या सशस्त्र बल के अधिकारी के कार्य में बाधा डालने, उसे गुमराह करने अथवा हस्तक्षेप करने से संबंधित है।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम का उद्देश्य न्यायालयों में साक्ष्यों की ग्राह्यता, प्रासंगिकता और प्रमाण से संबंधित नियम निर्धारित करना था; वह इस कार्रवाई को अपराध घोषित करने वाला कानून नहीं था।
इसके अतिरिक्त, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने प्रतिस्थापित कर दिया है, जो 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी हुआ। किंतु यह 2023 के प्रश्न के ऐतिहासिक उत्तर को नहीं बदलता।
युग्म 3 सही है
आयुध (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने आयुध अधिनियम, 1959 में संशोधन करके जश्न मनाने के लिए गोली चलाने को विशिष्ट अपराध बनाया।
आयुध अधिनियम की संशोधित धारा 25(9) के अनुसार जश्न मनाने के लिए लापरवाही या उतावलेपन से आग्नेयास्त्र चलाना, जिससे मानव जीवन अथवा दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़े, दंडनीय है।
इस अपराध के लिए:
अधिकतम दो वर्ष तक का कारावास;
अधिकतम ₹1 लाख तक का जुर्माना; अथवा
दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
यह आवश्यक नहीं है कि गोली चलने से वास्तव में किसी व्यक्ति की मृत्यु या चोट हो। दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला जश्न का गोलीकांड भी इस प्रावधान के अंतर्गत आ सकता है।