Previous Year Question
भारत में ‘अनुसूचित क्षेत्रों’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
किसी राज्य के भीतर किसी क्षेत्र की अनुसूचित क्षेत्र के रूप में अधिसूचना राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से होती है।
अनुसूचित क्षेत्र बनाने वाली सबसे बड़ी प्रशासनिक इकाई जिला और सबसे छोटी इकाई ब्लॉक में गाँवों का समूह है।
संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करना अपेक्षित है।
उपर्युक्तकथनोंमेंसेकितनेसहीहैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
कोई भी नहीं
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 सही है
संविधान की पाँचवीं अनुसूची के पैराग्राफ 6 के अनुसार राष्ट्रपति आदेश द्वारा किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित कर सकता है।
राष्ट्रपति को यह शक्ति भी प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा:
किसी अनुसूचित क्षेत्र का संपूर्ण भाग अथवा कोई निर्दिष्ट भाग अनुसूचित क्षेत्र की श्रेणी से बाहर कर दे।
किसी राज्य के अनुसूचित क्षेत्र का विस्तार करे।
राज्य की सीमाओं में परिवर्तन अथवा नए राज्य के गठन की स्थिति में किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करे।
अनुसूचित क्षेत्र की सीमाओं में संशोधन करे।
ऐसा आदेश संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श के बाद जारी किया जाता है। इसलिए किसी राज्य सरकार द्वारा अकेले किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित नहीं किया जा सकता।
कथन 2 सही है
अनुसूचित क्षेत्र निर्धारित करने के लिए भारत सरकार द्वारा सामान्यतः निम्नलिखित मानदंड अपनाए जाते हैं:
जनजातीय जनसंख्या की प्रधानता।
क्षेत्र की सघनता और उचित आकार।
क्षेत्र का अपेक्षाकृत अविकसित होना।
लोगों की आर्थिक स्थिति में स्पष्ट असमानता।
अनुसूचित क्षेत्र बनाने वाली सबसे बड़ी प्रशासनिक इकाई सामान्यतः जिला और सबसे छोटी इकाई किसी ब्लॉक के भीतर गाँवों का समूह होती है। सामान्य सिद्धांत यह है कि केवल एक अलग-थलग गाँव के स्थान पर प्रशासनिक रूप से व्यवहार्य और सघन जनजातीय क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र में सम्मिलित किया जाए।
कथन 3 गलत है
अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर वार्षिक प्रतिवेदन मुख्यमंत्री द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को प्रस्तुत नहीं किया जाता।
पाँचवीं अनुसूची के पैराग्राफ 3 के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों वाले प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, प्रतिवर्ष अथवा राष्ट्रपति द्वारा अपेक्षित होने पर, इन क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है।
संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार संबंधित राज्य को अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में निर्देश देने तक है। अतः कथन में मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्रालय का उल्लेख गलत है।
पाँचवीं अनुसूची का विस्तार
पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन तथा नियंत्रण से संबंधित है। यह असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के उन जनजातीय क्षेत्रों पर लागू नहीं होती, जो छठी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं।
वर्तमान में पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र निम्नलिखित दस राज्यों में हैं:
आंध्र प्रदेश
तेलंगाना
छत्तीसगढ़
गुजरात
हिमाचल प्रदेश
झारखंड
मध्य प्रदेश
महाराष्ट्र
ओडिशा
राजस्थान
राज्यपाल की विशेष शक्तियाँ
पाँचवीं अनुसूची के पैराग्राफ 5 के अंतर्गत राज्यपाल अधिसूचना द्वारा निर्देश दे सकता है कि संसद या राज्य विधानमंडल का कोई कानून अनुसूचित क्षेत्र में लागू नहीं होगा अथवा निर्दिष्ट अपवादों और संशोधनों के साथ लागू होगा।
राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्रों में शांति और सुशासन के लिए विनियम भी बना सकता है, जिनमें विशेष रूप से शामिल हैं:
अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों द्वारा भूमि के अंतरण को प्रतिबंधित या सीमित करना।
जनजातीय सदस्यों को भूमि के आबंटन को विनियमित करना।
अनुसूचित जनजातियों को ऋण देने वाले साहूकारों के व्यवसाय को नियंत्रित करना।
राज्यपाल द्वारा बनाया गया ऐसा विनियम राष्ट्रपति की स्वीकृति के बिना प्रभावी नहीं होता।
जनजाति सलाहकार परिषद
अनुसूचित क्षेत्रों वाले प्रत्येक राज्य में जनजाति सलाहकार परिषद स्थापित की जाती है। इसमें अधिकतम 20 सदस्य होते हैं और यथासंभव तीन-चौथाई सदस्य राज्य विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होते हैं। परिषद अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और उन्नति से संबंधित विषयों पर राज्यपाल को सलाह देती है।