Previous Year Question
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
इसके उपबंध 18वीं लोकसभा से प्रभावी होंगे।
अधिनियम बनने के बाद यह 15 वर्षों तक प्रवृत्त रहेगा।
अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित कोटे के भीतर अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए स्थानों के आरक्षण का उपबंध है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
1, 2 और 3
1 और 2
2 और 3
1 और 3
Correct Answer: C
Detailed Solution
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का औपचारिक नाम संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 है। इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति 28 सितंबर, 2023 को प्राप्त हुई।
कथन 1 गलत है
अधिनियम में यह नहीं कहा गया है कि महिलाओं का आरक्षण 18वीं लोकसभा से स्वतः प्रभावी हो जाएगा।
संविधान में जोड़े गए अनुच्छेद 334A के अनुसार आरक्षण के प्रावधान निम्नलिखित प्रक्रिया के बाद प्रभावी होंगे:
संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद पहली जनगणना आयोजित हो।
उस जनगणना के प्रासंगिक आँकड़े प्रकाशित किए जाएँ।
उन आँकड़ों के आधार पर महिलाओं के आरक्षण के उद्देश्य से परिसीमन किया जाए।
अतः आरक्षण का प्रारंभ किसी निश्चित लोकसभा संख्या से नहीं, बल्कि जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया है। 18वीं लोकसभा का गठन 2024 में सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों की व्यवस्था के अनुसार हुआ; इसमें इस अधिनियम के तहत आरक्षित महिला निर्वाचन क्षेत्र लागू नहीं हुए।
कथन 2 सही है—लेकिन एक कानूनी स्पष्टीकरण आवश्यक है
संविधान के अनुच्छेद 334A में महिलाओं के लिए आरक्षण को उसके प्रभावी होने से 15 वर्ष की अवधि तक लागू रखने का प्रावधान है। संसद कानून बनाकर इसकी निरंतरता के विषय में आगे व्यवस्था कर सकती है।
प्रश्न के कथन में “अधिनियम बनने के बाद” शब्द प्रयुक्त हैं, लेकिन संवैधानिक पाठ में 15 वर्ष की अवधि का संबंध आरक्षण के प्रभावी होने से है, न कि केवल 28 सितंबर, 2023 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने से।
कथन 3 सही है
संशोधन के अनुसार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई सीटें आरक्षित की जाएँगी। इसमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए पहले से आरक्षित सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई आरक्षण सम्मिलित है।
उदाहरणतः यदि किसी सदन में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों की कुल संख्या 30 है, तो उनमें लगभग 10 सीटें अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं।
अधिनियम द्वारा किए गए प्रमुख संवैधानिक परिवर्तन
अनुच्छेद 330A: लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण।
अनुच्छेद 332A: राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण।
अनुच्छेद 239AA में संशोधन: दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण।
अनुच्छेद 334A: आरक्षण के प्रभावी होने, अवधि, परिसीमन और चक्रानुक्रम की व्यवस्था।
आरक्षण की सीमा
यह आरक्षण निम्न सदनों—लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा—से संबंधित है। यह राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों पर लागू नहीं होता।
अधिनियम में अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए अलग उप-आरक्षण का प्रावधान नहीं है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए उप-आरक्षण इसलिए उपलब्ध है क्योंकि इन वर्गों के लिए संविधान में पहले से सीट-आरक्षण मौजूद है।
आरक्षित सीटों का चक्रानुक्रम प्रत्येक परिसीमन के बाद संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार किया जा सकता है।