JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2024

Previous Year Question

निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

दल

इसका नेता

1. भारतीय जन संघ

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

2. सोशलिस्ट पार्टी

सी. राजगोपालाचारी

3. कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी

जगजीवन राम

4. स्वतंत्र पार्टी

आचार्य नरेंद्र देव

उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?

A.

केवल एक

B.

केवल दो

C.

केवल तीन

D.

सभी चार

Correct Answer: B

Detailed Solution

1. भारतीय जन संघ—डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: सही

भारतीय जन संघ की स्थापना 21 अक्टूबर, 1951 को दिल्ली में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में हुई थी। वे इसके संस्थापक अध्यक्ष बने।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वतंत्र भारत की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उद्योग और आपूर्ति मंत्री रहे थे। नेहरू-लियाकत समझौते और अन्य नीतिगत मतभेदों के कारण उन्होंने अप्रैल 1950 में मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया।

भारतीय जन संघ ने वर्ष 1977 में अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर जनता पार्टी के गठन में भाग लिया। बाद में वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई।

2. सोशलिस्ट पार्टी—सी. राजगोपालाचारी: गलत

सी. राजगोपालाचारी सोशलिस्ट पार्टी के नेता नहीं थे। वे स्वतंत्र भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल, मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे थे। बाद में उन्होंने स्वतंत्र पार्टी की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई।

भारत में समाजवादी राजनीतिक धारा से आचार्य नरेंद्र देव, जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया और अन्य नेता संबंधित थे। वर्ष 1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन हुआ था। स्वतंत्रता के बाद यह धारा सोशलिस्ट पार्टी और बाद के विभिन्न समाजवादी दलों के रूप में विकसित हुई।

3. कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी—जगजीवन राम: सही

कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी—CFD की स्थापना फरवरी 1977 में जगजीवन राम, हेमवती नंदन बहुगुणा और नंदिनी सत्पथी सहित कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं ने की थी।

इस दल ने 1977 का लोकसभा चुनाव जनता पार्टी के साथ मिलकर लड़ा। चुनाव के बाद कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी का जनता पार्टी में विलय हो गया। जगजीवन राम बाद में मोरारजी देसाई सरकार में उप-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बने।

4. स्वतंत्र पार्टी—आचार्य नरेंद्र देव: गलत

स्वतंत्र पार्टी की स्थापना वर्ष 1959 में सी. राजगोपालाचारी, मीनू मसानी, एन.जी. रंगा और अन्य नेताओं द्वारा की गई थी। यह कांग्रेस की समाजवादी और राज्य-नियंत्रित आर्थिक नीतियों के विरोध में निजी उद्यम, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था तथा सीमित सरकारी नियंत्रण का समर्थन करती थी।

आचार्य नरेंद्र देव स्वतंत्र पार्टी के नहीं, बल्कि भारत के प्रमुख समाजवादी नेताओं में थे। वे कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना से जुड़े थे और बाद में सोशलिस्ट पार्टी की राजनीति में सक्रिय रहे।

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