JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2012

Previous Year Question

भारत में सार्वजनिक निधियों का कुशलतापूर्वक और निर्धारित प्रयोजन के लिए उपयोग सुनिश्चित करने के अतिरिक्त, नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) के कार्यालय का क्या महत्त्व है?

  1. भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल/वित्तीय आपातकाल घोषित किए जाने पर CAG संसद की ओर से राजकोष पर नियंत्रण रखता है।

  2. मंत्रालयों द्वारा परियोजनाओं या कार्यक्रमों के निष्पादन से संबंधित CAG के प्रतिवेदनों पर लोक लेखा समिति में चर्चा होती है।

  3. सार्वजनिक वित्त का प्रबंधन करते समय कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप लगाने के लिए जाँच एजेंसियाँ CAG के प्रतिवेदनों की जानकारी का प्रयोग कर सकती हैं।

  4. सरकारी कंपनियों की लेखापरीक्षा और लेखांकन करते समय कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों पर अभियोजन चलाने के लिए CAG को कुछ न्यायिक शक्तियाँ प्राप्त हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

1, 3 और 4

B.

केवल 2

C.

2 और 3

D.

1, 2, 3 और 4

Correct Answer: C

Detailed Solution

कथन 1 गलत है। CAG संसद की ओर से राजकोष पर पूर्व नियंत्रण नहीं रखता। वह सरकार द्वारा व्यय किए जाने के बाद लेखापरीक्षा करके यह जाँचता है कि व्यय संसद द्वारा किए गए विनियोग, संबंधित कानूनों और वित्तीय नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।

भारत में CAG की भूमिका मुख्यतः लेखापरीक्षा के बाद उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने की है। राष्ट्रीय आपातकाल या वित्तीय आपातकाल घोषित होने पर भी CAG को सरकारी धन की निकासी पर प्रत्यक्ष राजकोषीय नियंत्रण प्राप्त नहीं हो जाता।

कथन 2 सही है। संविधान के अनुच्छेद 151 के अनुसार संघ के लेखों से संबंधित CAG के प्रतिवेदन राष्ट्रपति को प्रस्तुत किए जाते हैं, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है। राज्यों से संबंधित प्रतिवेदन राज्यपाल को दिए जाते हैं और राज्य विधानमंडल के समक्ष रखे जाते हैं।

संसद की लोक लेखा समिति विनियोग लेखों, वार्षिक वित्त लेखों और CAG के प्रतिवेदनों की जाँच करती है। इसमें मंत्रालयों और विभागों की परियोजनाओं तथा कार्यक्रमों से संबंधित वित्तीय, अनुपालन और निष्पादन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन शामिल हो सकते हैं। इसी कारण CAG को लोक लेखा समिति का “मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक” कहा जाता है।

कथन 3 सही है। CAG के प्रतिवेदन सार्वजनिक धन के उपयोग में अनियमितता, नियमों के उल्लंघन, हानि, अपव्यय अथवा संभावित भ्रष्टाचार से संबंधित तथ्य सामने ला सकते हैं। सक्षम जाँच एजेंसियाँ इस जानकारी का प्रयोग आगे की जाँच और कानून के अनुसार कार्रवाई के लिए कर सकती हैं।

CAG का निष्कर्ष अपने आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक दोषसिद्धि नहीं है। अपराध निर्धारित करना, आरोप-पत्र दाखिल करना और अभियोजन चलाना सक्षम जाँच एवं अभियोजन एजेंसियों तथा न्यायालयों का कार्य है।

कथन 4 गलत है। CAG को न्यायिक या अभियोजन संबंधी शक्तियाँ प्राप्त नहीं हैं। वह सरकारी कंपनियों की लेखापरीक्षा से संबंधित कार्य कर सकता है, लेखापरीक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकता है और उनके लेखों पर पूरक लेखापरीक्षा या टिप्पणियाँ कर सकता है, लेकिन वह किसी व्यक्ति को दोषी ठहराकर दंडित अथवा अभियोजित नहीं कर सकता।

संविधान का अनुच्छेद 148 CAG के पद और उसकी स्वतंत्रता की व्यवस्था करता है। अनुच्छेद 149 उसके कर्तव्यों और शक्तियों को संसद द्वारा बनाए गए कानून के अधीन रखता है। इनका विस्तृत निर्धारण नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा की शर्तें अधिनियम, 1971 में किया गया है।

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