Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
भारत का महान्यायवादी:
लोक सभा की कार्यवाही में भाग ले सकता है।
लोक सभा की किसी समिति का सदस्य हो सकता है।
लोक सभा में बोल सकता है।
लोक सभा में मतदान कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
2 और 4
1, 2 और 3
1 और 3
Correct Answer: C
Detailed Solution
कथन 1 सही है। संविधान का अनुच्छेद 88 भारत के महान्यायवादी को संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार देता है। इस अधिकार के प्रयोग के लिए उसका संसद का सदस्य होना आवश्यक नहीं है।
कथन 2 सही है। महान्यायवादी संसद की ऐसी समिति की कार्यवाही में भाग ले सकता है जिसका उसे सदस्य नामित किया गया हो। इसलिए वह लोक सभा की किसी समिति का नामित सदस्य हो सकता है और उसके कार्य में भाग ले सकता है।
कथन 3 सही है। अनुच्छेद 88 के अंतर्गत महान्यायवादी को लोक सभा, राज्य सभा और दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में बोलने का अधिकार प्राप्त है। अनुच्छेद 105(4) संसद में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने के दौरान उसे संबंधित संसदीय विशेषाधिकार भी प्रदान करता है।
कथन 4 गलत है। महान्यायवादी को अनुच्छेद 88 के आधार पर संसद में मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। यदि वह अलग से संसद का निर्वाचित या नामित सदस्य नहीं है, तो वह किसी सदन या संसदीय समिति में मत नहीं दे सकता। महान्यायवादी सामान्यतः संसद का सदस्य नहीं होता।
संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त करता है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह हो। वह भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी है और सरकार को विधिक विषयों पर सलाह देता है।
महान्यायवादी भारत सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय और अन्य न्यायालयों में उपस्थित हो सकता है। अनुच्छेद 76(3) उसे भारत के राज्यक्षेत्र में सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्रदान करता है। वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।