Previous Year Question
‘ग्राम न्यायालय अधिनियम’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
इस अधिनियम के अनुसार ग्राम न्यायालय केवल दीवानी मामलों की सुनवाई कर सकते हैं, दांडिक मामलों की नहीं।
यह अधिनियम स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को मध्यस्थ/सुलहकर्ता के रूप में कार्य करने की अनुमति देता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 गलत है। ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 के अंतर्गत ग्राम न्यायालयों को दीवानी और दांडिक दोनों प्रकार के मामलों की सुनवाई करने की अधिकारिता प्राप्त है।
ग्राम न्यायालय अधिनियम की पहली अनुसूची में दांडिक अपराध तथा दूसरी अनुसूची में ऐसे अन्य अपराध दिए गए हैं जिन्हें ग्राम न्यायालय सुन सकता है। इसी प्रकार अधिनियम की दूसरी अनुसूची में ग्राम न्यायालय की दीवानी अधिकारिता के अंतर्गत आने वाले विवादों की प्रकृति भी निर्धारित की गई है। केंद्र और राज्य सरकारें अधिसूचना द्वारा अनुसूचियों में निर्धारित सीमा के अंतर्गत परिवर्तन कर सकती हैं।
ग्राम न्यायालय दांडिक मामलों में संक्षिप्त विचारण की प्रक्रिया अपना सकता है। ग्राम न्यायालय द्वारा दिए गए दांडिक निर्णय के विरुद्ध अपील सत्र न्यायालय में और दीवानी निर्णय के विरुद्ध अपील जिला न्यायालय में की जा सकती है। सामान्यतः अपील 30 दिन के भीतर प्रस्तुत की जाती है।
कथन 2 सही है। अधिनियम दीवानी विवादों को यथासंभव समझौते के माध्यम से निपटाने पर बल देता है। ग्राम न्यायालय को प्रत्येक दीवानी वाद में पहले पक्षकारों के बीच सुलह कराने का प्रयास करना चाहिए, जहाँ मामले की प्रकृति इसकी अनुमति देती हो।
जिला न्यायालय, जिला मजिस्ट्रेट के परामर्श से, गाँव स्तर पर सत्यनिष्ठा रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक सूची तैयार करता है। उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित योग्यता और अनुभव रखने वाले इन व्यक्तियों को सुलहकर्ता के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। इसलिए स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुलह प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।
ग्राम न्यायालय की अध्यक्षता न्यायाधिकारी करता है। राज्य सरकार उच्च न्यायालय के परामर्श से न्यायाधिकारी की नियुक्ति करती है। नियुक्त व्यक्ति में प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त होने की अर्हता होनी चाहिए।
ग्राम न्यायालयों का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को उनके निवास के निकट सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। न्यायाधिकारी गाँवों में सचल न्यायालय भी लगा सकता है।