JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2017

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत निर्वाचन आयोग पाँच-सदस्यीय निकाय है।

  2. केंद्रीय गृह मंत्रालय आम चुनाव और उप-चुनाव दोनों के संचालन के लिए निर्वाचन कार्यक्रम तय करता है।

  3. निर्वाचन आयोग मान्यता-प्राप्त राजनीतिक दलों के विभाजन/विलय से संबंधित विवादों का समाधान करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

1 और 2

B.

केवल 2

C.

2 और 3

D.

केवल 3

Correct Answer: D

Detailed Solution

कथन 1 गलत है। संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग की संरचना का प्रावधान करता है। आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतनी संख्या में अन्य निर्वाचन आयुक्त हो सकते हैं, जितनी संख्या राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित करे। इसलिए संविधान निर्वाचन आयोग को पाँच-सदस्यीय निकाय के रूप में निर्धारित नहीं करता।

प्रश्न पूछे जाने के समय निर्वाचन आयोग तीन-सदस्यीय निकाय था—एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्त। आयोग की सदस्य-संख्या संविधान में स्थायी रूप से तीन भी निर्धारित नहीं है; अन्य निर्वाचन आयुक्तों की संख्या कानून और संवैधानिक व्यवस्था के अधीन निर्धारित की जा सकती है।

कथन 2 गलत है। लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा उप-चुनावों का निर्वाचन कार्यक्रम केंद्रीय गृह मंत्रालय निर्धारित नहीं करता। चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति अनुच्छेद 324 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग में निहित है। निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीखों और विभिन्न चरणों की घोषणा करता है।

भारत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का संचालन करता है। पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव भारत निर्वाचन आयोग नहीं, बल्कि संबंधित राज्य निर्वाचन आयोग कराते हैं।

कथन 3 सही है। निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग मान्यता-प्राप्त राजनीतिक दल के प्रतिद्वंद्वी समूहों या वर्गों के बीच उत्पन्न विवाद का निर्णय करता है।

आयोग यह निर्धारित कर सकता है कि कौन-सा समूह मूल मान्यता-प्राप्त राजनीतिक दल है और उसे आरक्षित चुनाव चिह्न का अधिकार प्राप्त होगा। निर्णय करते समय आयोग संगठनात्मक इकाई और विधायी इकाई में समर्थन सहित उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों की जाँच कर सकता है। आयोग का निर्णय संबंधित प्रतिद्वंद्वी समूहों पर बाध्यकारी होता है।

यह शक्ति मुख्यतः मान्यता और आरक्षित चुनाव चिह्न से संबंधित विवाद पर लागू होती है। दल का विभाजन या विलय अन्य विधिक विषयों—जैसे दसवीं अनुसूची के अंतर्गत सदस्यों की निरर्हता—को अलग संवैधानिक प्रक्रिया के अधीन ला सकता है।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.