Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
भारत के संविधान के संदर्भ में, यदि किसी राज्य के किसी क्षेत्र को पाँचवीं अनुसूची के अधीन अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया जाता है, तो:
राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में अपनी कार्यपालिका शक्ति खो देती है और एक स्थानीय निकाय संपूर्ण प्रशासन अपने हाथ में ले लेता है।
राज्यपाल की संस्तुति पर केंद्र सरकार कुछ परिस्थितियों में ऐसे क्षेत्रों का संपूर्ण प्रशासन अपने हाथ में ले सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन 1 गलत है। किसी क्षेत्र को पाँचवीं अनुसूची के अधीन अनुसूचित क्षेत्र घोषित किए जाने पर राज्य सरकार की कार्यपालिका शक्ति समाप्त नहीं होती। उसका प्रशासन राज्य सरकार के अधीन ही रहता है, लेकिन अनुसूचित जनजातियों और उनके संसाधनों की रक्षा के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्थाएँ लागू हो जाती हैं।
संविधान का अनुच्छेद 244(1) पाँचवीं अनुसूची को असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के अतिरिक्त अन्य राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों एवं अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन पर लागू करता है। इन चार पूर्वोत्तर राज्यों के निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्रों की व्यवस्था मुख्यतः छठी अनुसूची में है।
ग्राम सभा, पंचायत या अन्य स्थानीय निकाय को PESA अधिनियम के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण शक्तियाँ दी जा सकती हैं, लेकिन वह राज्य सरकार से अनुसूचित क्षेत्र का संपूर्ण प्रशासन अपने हाथ में नहीं लेता।
कथन 2 भी गलत है। पाँचवीं अनुसूची केंद्र सरकार को राज्यपाल की संस्तुति पर अनुसूचित क्षेत्र का संपूर्ण प्रशासन अपने हाथ में लेने की सामान्य शक्ति नहीं देती।
पाँचवीं अनुसूची के पैरा 3 के अनुसार राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को प्रतिवर्ष अथवा राष्ट्रपति द्वारा माँगे जाने पर रिपोर्ट देता है। संघ की कार्यपालिका शक्ति ऐसे क्षेत्रों के प्रशासन के विषय में राज्य को निर्देश देने तक विस्तृत है। यह व्यवस्था केंद्र द्वारा संपूर्ण प्रशासन के स्वतः अधिग्रहण के समान नहीं है।
पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्यपाल की कुछ विशेष शक्तियाँ हैं। राज्यपाल निर्देश दे सकता है कि संसद या राज्य विधानमंडल का कोई कानून अनुसूचित क्षेत्र में लागू नहीं होगा अथवा अपवादों और परिवर्तनों के साथ लागू होगा। वह अनुसूचित क्षेत्र में शांति और सुशासन के लिए विनियम भी बना सकता है, जिनमें जनजातीय भूमि के हस्तांतरण को सीमित करना, भूमि आवंटन और साहूकारी का विनियमन शामिल हो सकता है। ऐसे विनियमों के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक होती है।
राज्यपाल अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और उन्नति से संबंधित विषयों पर जनजातीय सलाहकार परिषद से परामर्श करता है। राष्ट्रपति को किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने तथा उसकी सीमाओं में परिवर्तन करने की शक्ति है। इन विशेष व्यवस्थाओं के बावजूद प्रशासन राज्य का ही रहता है।