JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2025

Previous Year Question

लोकपाल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. लोकपाल की शक्ति भारत के लोक सेवकों पर लागू होती है, लेकिन भारत के बाहर पदस्थ भारतीय लोक सेवकों पर लागू नहीं होती।

  2. अध्यक्ष या कोई सदस्य संसद का सदस्य अथवा किसी राज्य या संघ राज्य-क्षेत्र के विधानमंडल का सदस्य नहीं होगा और केवल भारत का मुख्य न्यायमूर्ति, चाहे पदासीन हो या सेवानिवृत्त, इसका अध्यक्ष हो सकता है।

  3. अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पद ग्रहण करने की तारीख को अध्यक्ष या सदस्य, जैसी भी स्थिति हो, 45 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति नहीं होगा।

  4. लोकपाल भारत के पदासीन प्रधानमंत्री के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच नहीं कर सकता।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 3

B.

केवल 2 और 3

C.

केवल 1 और 4

D.

उपर्युक्त कथनों में से कोई भी सही नहीं है

Correct Answer: A

Detailed Solution

कथन 1 गलत है। लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की अधिकारिता भारत के भीतर और भारत के बाहर कार्यरत भारतीय लोक सेवकों पर लागू हो सकती है। अधिनियम की धारा 14 केंद्र सरकार के अधीन लोक सेवकों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों पर लोकपाल की अधिकारिता निर्धारित करती है। इसलिए भारत के बाहर पदस्थ होने मात्र से कोई भारतीय लोक सेवक लोकपाल की अधिकारिता से बाहर नहीं हो जाता।

कथन 2 गलत है। यह सही है कि लोकपाल का अध्यक्ष या सदस्य संसद अथवा किसी राज्य या संघ राज्य-क्षेत्र के विधानमंडल का सदस्य नहीं हो सकता। लेकिन केवल भारत का मुख्य न्यायमूर्ति ही अध्यक्ष हो सकता है, यह गलत है।

लोकपाल का अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो भारत का मुख्य न्यायमूर्ति है या रह चुका है, उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश है या रह चुका है अथवा निर्धारित योग्यता और अनुभव वाला प्रतिष्ठित व्यक्ति है। इसलिए अध्यक्षता केवल पदासीन या सेवानिवृत्त मुख्य न्यायमूर्ति तक सीमित नहीं है।

कथन 3 सही है। अधिनियम के अनुसार अध्यक्ष या सदस्य नियुक्त होने के लिए व्यक्ति को पद ग्रहण करने की तारीख को कम-से-कम 45 वर्ष की आयु पूरी करनी चाहिए। अतः 45 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति अध्यक्ष या सदस्य नियुक्त नहीं हो सकता।

कथन 4 गलत है। लोकपाल कुछ विशेष सुरक्षा और अपवादों के अधीन पदासीन प्रधानमंत्री के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच कर सकता है। प्रधानमंत्री से संबंधित शिकायत पर विचार करने के लिए लोकपाल की पूर्ण पीठ की स्वीकृति तथा कम-से-कम दो-तिहाई सदस्यों का अनुमोदन आवश्यक है। ऐसी कार्यवाही बंद कमरे में की जाती है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों, बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा, लोक व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष से संबंधित प्रधानमंत्री के निर्णयों पर लोकपाल जाँच नहीं कर सकता। यदि शिकायत खारिज कर दी जाती है, तो उससे संबंधित अभिलेख प्रकाशित या उपलब्ध नहीं कराए जाते।

लोकपाल की संरचना: लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं। सदस्यों में से 50 प्रतिशत न्यायिक सदस्य होने चाहिए। कुल सदस्यों में कम-से-कम 50 प्रतिशत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं में से होने चाहिए।

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