Previous Year Question
निम्नलिखित में से किनको समावेशी शासन के आवश्यक अंग कहा जा सकता है?
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बैंकिंग करने की अनुमति देना।
सभी जिलों में प्रभावी जिला योजना समितियाँ स्थापित करना।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सरकारी व्यय में वृद्धि करना।
मध्याह्न भोजन योजना को सुदृढ़ करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
1 और 2
3 और 4
2, 3 और 4
1, 2, 3 और 4
Correct Answer: C
Detailed Solution
समावेशी शासन का उद्देश्य शासन और विकास की प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों, विशेषकर निर्धन, वंचित और कमजोर समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा सार्वजनिक सेवाओं तक उनकी समान पहुँच बढ़ाना है।
कथन 1 सही नहीं है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बैंकिंग करने की अनुमति देना मूलतः वित्तीय विनियमन से संबंधित विषय है। कोई संस्था केवल NBFC होने के कारण बैंक नहीं बन जाती। बैंकिंग व्यवसाय करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से निर्धारित विधिक और नियामकीय शर्तों के अंतर्गत बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसलिए NBFC को बैंकिंग की अनुमति देना अपने आप में समावेशी शासन का आवश्यक अंग नहीं है।
कथन 2 सही है। संविधान के अनुच्छेद 243ZD के अनुसार प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर जिला योजना समिति गठित की जानी है। यह जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं द्वारा तैयार योजनाओं को समेकित करके पूरे जिले के लिए विकास योजना का प्रारूप तैयार करती है। प्रभावी जिला योजना समिति स्थानीय आवश्यकताओं, ग्रामीण-नगरीय समन्वय और जमीनी स्तर की भागीदारी को जिला योजना में स्थान देती है; इसलिए यह समावेशी शासन का महत्त्वपूर्ण अंग है।
कथन 3 सही है। सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सरकारी व्यय बढ़ाने से निर्धन और कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और वहनीयता बढ़ती है। इससे परिवारों द्वारा अपनी जेब से किए जाने वाले स्वास्थ्य व्यय तथा बीमारी के कारण निर्धनता में जाने का जोखिम कम किया जा सकता है। संविधान का अनुच्छेद 47 सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार को राज्य का प्राथमिक कर्तव्य मानता है।
कथन 4 सही है। मध्याह्न भोजन योजना विद्यालयी बच्चों में पोषण सुधारने के साथ नामांकन, उपस्थिति और विद्यालय में बने रहने को प्रोत्साहित करती है। इससे विशेष रूप से निर्धन परिवारों, लड़कियों तथा सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के बच्चों को लाभ मिलता है। विद्यालय में साथ भोजन करने से सामाजिक समानता को भी प्रोत्साहन मिलता है। इस योजना को अब प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) के नाम से संचालित किया जाता है।