JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2015

Previous Year Question

पंचायती राज प्रणाली का आधारभूत उद्देश्य निम्नलिखित में से किसे सुनिश्चित करना है?

  1. विकास में जन-भागीदारी

  2. राजनीतिक जवाबदेही

  3. लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण

  4. वित्तीय संग्रहण

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A.

1, 2 और 3

B.

2 और 4

C.

1 और 3

D.

1, 2, 3 और 4

Correct Answer: C

Detailed Solution

पंचायती राज प्रणाली के आधारभूत उद्देश्य विकास में जन-भागीदारी और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण हैं। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।

विकास में जन-भागीदारी का अर्थ है कि ग्रामीण जनता केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी न रहे, बल्कि ग्राम स्तर की आवश्यकताओं की पहचान, योजनाओं के निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाए। ग्राम सभा स्थानीय जनता को इस प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी का संवैधानिक मंच प्रदान करती है।

लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण में शासन की शक्तियों और उत्तरदायित्वों को राज्य स्तर से निर्वाचित स्थानीय संस्थाओं को हस्तांतरित किया जाता है। बलवंत राय मेहता समिति ने भी पंचायती राज को लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की संस्थागत व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया था।

73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने संविधान में भाग IX जोड़कर पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया। अनुच्छेद 243G के अनुसार राज्य विधानमंडल पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा उन्हें लागू करने की शक्तियाँ और उत्तरदायित्व प्रदान कर सकता है। ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों से संबंधित 29 विषय दिए गए हैं।

राजनीतिक जवाबदेही लोकतांत्रिक स्थानीय शासन का एक महत्त्वपूर्ण परिणाम हो सकती है, क्योंकि प्रतिनिधि स्थानीय मतदाताओं के निकट होते हैं। फिर भी प्रश्न के संदर्भ में इसे पंचायती राज का आधारभूत उद्देश्य नहीं माना गया है।

इसी प्रकार वित्तीय संग्रहण पंचायतों के कार्य करने का साधन है, मूल उद्देश्य नहीं। अनुच्छेद 243H राज्यों को पंचायतों द्वारा कर, शुल्क, पथकर और फीस लगाने तथा एकत्र करने की व्यवस्था बनाने की अनुमति देता है। वित्तीय संसाधनों का उद्देश्य पंचायतों को विकास और सामाजिक न्याय के कार्य करने में सक्षम बनाना है।

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