JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2018

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत की संसद किसी विशिष्ट विधि को भारत के संविधान की नौवीं अनुसूची में रख सकती है।

  2. नौवीं अनुसूची में रखी गई विधि की वैधता का परीक्षण किसी न्यायालय द्वारा नहीं किया जा सकता और उस पर कोई निर्णय नहीं दिया जा सकता।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

केवल 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

न तो 1 और न ही 2

Correct Answer: A

Detailed Solution

कथन 1 सही है। संसद संविधान संशोधन अधिनियम पारित करके किसी विधि को नौवीं अनुसूची में सम्मिलित कर सकती है। नौवीं अनुसूची और अनुच्छेद 31B को संविधान (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था। प्रारम्भ में इसका प्रमुख उद्देश्य भूमि सुधार और जमींदारी उन्मूलन से संबंधित कानूनों को मूल अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर निरस्त होने से बचाना था।

किसी विधि को नौवीं अनुसूची में रखना संसद का सामान्य विधायी कार्य नहीं, बल्कि संविधान संशोधन की प्रक्रिया है। इसलिए इसके लिए अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन विधेयक पारित करना आवश्यक होता है। संविधान संशोधन की यह शक्ति भी संविधान की मूल संरचना की सीमा के अधीन है।

कथन 2 गलत है। अनुच्छेद 31B नौवीं अनुसूची में सम्मिलित विधियों को मूल अधिकारों से असंगति के आधार पर संरक्षण देता है, लेकिन यह संरक्षण अब पूर्ण नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने आई. आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य (2007) में निर्णय दिया कि 24 अप्रैल, 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में रखी गई विधियाँ न्यायिक पुनर्विलोकन के अधीन हैं। यह तिथि केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के निर्णय की तिथि है, जिसमें संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया था।

यदि नौवीं अनुसूची में सम्मिलित कोई कानून मूल अधिकारों—विशेष रूप से अनुच्छेद 14, 19 और 21—पर ऐसा प्रभाव डालता है जिससे संविधान की मूल संरचना क्षतिग्रस्त होती है, तो न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है। न्यायिक पुनर्विलोकन स्वयं संविधान की मूल संरचना का एक भाग है।

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