Previous Year Question
भारत के उच्चतम न्यायालय की स्वायत्तता की रक्षा हेतु क्या उपबंध हैं?
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय भारत के राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श करना पड़ता है।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को केवल भारत के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा हटाया जा सकता है।
न्यायाधीशों के वेतन भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं, जिस पर विधान-मंडल को मतदान नहीं करना होता।
भारत के उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की सभी नियुक्तियाँ सरकार द्वारा केवल भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श करने के पश्चात् की जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
1 और 3
3 और 4
केवल 4
ये सभी
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन 1 सही है।
संविधान के अनुच्छेद 124(2) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श करता है, जिनसे परामर्श करना वह आवश्यक समझता है।
मुख्य न्यायमूर्ति के अतिरिक्त किसी अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श करना अनिवार्य है।
वर्तमान नियुक्ति-व्यवस्था में उच्चतम न्यायालय द्वारा विकसित कॉलेजियम प्रणाली भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कथन 2 गलत है।
भारत के मुख्य न्यायमूर्ति किसी न्यायाधीश को पद से नहीं हटा सकते।
अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
इसके लिए संसद के प्रत्येक सदन को उसी सत्र में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है।
विशेष बहुमत में सदन की कुल सदस्य-संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।
कथन 3 सही है।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और पेंशन से संबंधित व्यय भारत की संचित निधि पर भारित होता है।
भारित व्यय संसद के मतदान के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाता; यद्यपि संसद में उस पर चर्चा की जा सकती है।
यह व्यवस्था न्यायपालिका को अपनी आर्थिक आवश्यकताओं के लिए कार्यपालिका अथवा संसद के वार्षिक मतदान पर निर्भर होने से बचाती है।
अनुच्छेद 125 के अनुसार, न्यायाधीश के पद ग्रहण करने के बाद उसके विशेषाधिकारों, भत्तों और पेंशन-संबंधी अधिकारों में उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन सामान्यतः नहीं किया जा सकता।
कथन 4 गलत है।
अनुच्छेद 146(1) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों की नियुक्तियाँ भारत के मुख्य न्यायमूर्ति अथवा उनके द्वारा अधिकृत न्यायाधीश या अधिकारी द्वारा की जाती हैं।
इसलिए सभी नियुक्तियाँ सरकार द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श करके नहीं की जातीं।
राष्ट्रपति नियम बनाकर कुछ निर्दिष्ट मामलों में संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श आवश्यक कर सकता है।