Previous Year Question
भारत के उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि करने की शक्ति किसमें निहित है?
भारत के राष्ट्रपति
संसद
भारत के मुख्य न्यायमूर्ति
विधि आयोग
Correct Answer: B
Detailed Solution
भारत के उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की शक्ति संसद में निहित है।
संविधान के अनुच्छेद 124(1) के मूल प्रावधान के अनुसार उच्चतम न्यायालय में:
भारत का एक मुख्य न्यायमूर्ति; और
जब तक संसद विधि द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न करे, अधिकतम सात अन्य न्यायाधीश होने थे।
इस प्रकार संविधान ने प्रारंभिक संरचना निर्धारित की, लेकिन आवश्यकता के अनुसार न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की शक्ति संसद को प्रदान की।
संसद द्वारा बनाई गई विधि
संसद ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 बनाया। समय-समय पर इस अधिनियम में संशोधन करके न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाई गई।
2019 के संशोधन द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति के अतिरिक्त अन्य न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई। इस प्रकार उच्चतम न्यायालय की कुल स्वीकृत न्यायाधीश संख्या:
भारत के मुख्य न्यायमूर्ति: 1
अन्य न्यायाधीश: अधिकतम 33
कुल स्वीकृत संख्या: 34
यह संख्या न्यायाधीशों के वास्तविक रिक्त पदों की संख्या नहीं, बल्कि विधि द्वारा निर्धारित अधिकतम स्वीकृत क्षमता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प (a)—राष्ट्रपति: राष्ट्रपति अनुच्छेद 124 के अनुसार उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है, लेकिन न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या स्वयं नहीं बढ़ा सकता। इसके लिए संसद द्वारा कानून बनाना आवश्यक है।
विकल्प (c)—मुख्य न्यायमूर्ति: भारत का मुख्य न्यायमूर्ति न्यायालय के प्रशासन, पीठों के गठन और मामलों के आवंटन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन न्यायाधीशों की वैधानिक संख्या नहीं बढ़ा सकता।
विकल्प (d)—विधि आयोग: विधि आयोग सरकार को न्यायिक सुधारों तथा न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित अनुशंसा दे सकता है, लेकिन उसकी अनुशंसाएँ बाध्यकारी नहीं होतीं और वह स्वयं संख्या नहीं बढ़ा सकता।
न्यायाधीशों की संख्या क्यों बढ़ाई जाती है?
संसद निम्नलिखित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संख्या बढ़ा सकती है:
लंबित मामलों की बढ़ती संख्या;
दायर होने वाले नए मामलों में वृद्धि;
संविधान पीठों और नियमित पीठों की आवश्यकता;
न्याय तक समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित करना; तथा
न्यायालय के कार्यभार का बेहतर वितरण।
अतः न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की अंतिम विधायी शक्ति संसद के पास है।