Previous Year Question
भारत के संविधान के संदर्भ में, साधारण विधियों में अंतर्विष्ट प्रतिषेध अथवा परिसीमाएँ अथवा उपबंध अनुच्छेद 142 के अधीन संवैधानिक शक्तियों पर प्रतिषेध अथवा परिसीमाओं की तरह कार्य नहीं कर सकते। इसका निम्नलिखित में से कौन-सा एक अर्थ हो सकता है?
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए लिए गए निर्णयों को किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
भारत का उच्चतम न्यायालय अपनी शक्तियों के प्रयोग में संसद द्वारा बनाई गई विधियों से बाध्य नहीं होता।
देश में गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति में भारत का राष्ट्रपति मंत्रिमंडल के परामर्श के बिना वित्तीय आपात घोषित कर सकता है।
राज्य विधानमंडल कुछ विषयों पर संघ विधानमंडल की सहमति के बिना विधियाँ नहीं बना सकते।
Correct Answer: B
Detailed Solution
अनुच्छेद 142(1)
उच्चतम न्यायालय अपने समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक डिक्री या आदेश पारित कर सकता है।
ऐसी डिक्री अथवा आदेश:
भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में प्रवर्तनीय होता है।
संसद द्वारा बनाई गई विधि में निर्धारित रीति से लागू किया जाता है।
ऐसी संसदीय विधि न होने तक राष्ट्रपति द्वारा आदेश से निर्धारित रीति से लागू किया जा सकता है।
चूँकि अनुच्छेद 142 की शक्ति सीधे संविधान से प्राप्त होती है, किसी साधारण संसदीय कानून का प्रावधान इस संवैधानिक शक्ति को उसी प्रकार समाप्त या सीमित नहीं कर सकता जैसे वह केवल वैधानिक शक्ति को कर सकता है। इस अर्थ में विकल्प (b) सही है।
अनुच्छेद 142(2)
संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन उच्चतम न्यायालय को भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में निम्नलिखित विषयों के संबंध में आदेश देने की शक्ति है:
किसी व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करना;
दस्तावेजों का पता लगाने या उन्हें प्रस्तुत कराने का आदेश देना; तथा
अपनी अवमानना की जाँच या दंड सुनिश्चित करना।
क्या अनुच्छेद 142 असीमित शक्ति है?
अनुच्छेद 142 उच्चतम न्यायालय को मनमानी या असीमित शक्ति नहीं देता।
इसका प्रयोग न्यायालय के समक्ष लंबित वाद या विषय में किया जाता है।
इसका उद्देश्य पूर्ण न्याय करना है।
इसका प्रयोग संविधान के स्पष्ट प्रावधानों, मूल अधिकारों और संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध नहीं किया जा सकता।
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 142 विधि का पूरक हो सकता है, लेकिन सामान्यतः मूल विधिक अधिकारों को समाप्त करने या किसी मूल वैधानिक व्यवस्था को पूरी तरह प्रतिस्थापित करने का साधन नहीं है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प (a): निर्वाचन आयोग के निर्णय पूर्णतः न्यायिक पुनर्विलोकन से बाहर नहीं हैं। अनुच्छेद 329 चुनाव प्रक्रिया में न्यायालयीय हस्तक्षेप को विशेष रूप से नियंत्रित करता है, लेकिन निर्वाचन आयोग की कार्रवाई असंवैधानिक, दुर्भावनापूर्ण या अधिकारिता से बाहर होने पर न्यायिक समीक्षा संभव हो सकती है।
विकल्प (c): अनुच्छेद 360 के अंतर्गत वित्तीय आपात की उद्घोषणा राष्ट्रपति करता है, लेकिन राष्ट्रपति अनुच्छेद 74 के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद् की सहायता और सलाह पर कार्य करता है।
विकल्प (d): राज्य विधानमंडलों की विधायी क्षमता अनुच्छेद 245, 246, सातवीं अनुसूची और अन्य संबंधित प्रावधानों द्वारा निर्धारित होती है। इसका अनुच्छेद 142 की शक्ति से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।