JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2019

Previous Year Question

भारत के संविधान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. किसी भी केंद्रीय विधि को संवैधानिक रूप से अविधिमान्य घोषित करने की अधिकारिता किसी भी उच्च न्यायालय की नहीं होगी।

  2. भारत के संविधान के किसी भी संशोधन पर भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

केवल 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

न तो 1, न ही 2

Correct Answer: D

Detailed Solution

कथन 1 गलत है

उच्च न्यायालय को केंद्रीय और राज्य—दोनों प्रकार की विधियों की संवैधानिक वैधता की जाँच करने की शक्ति प्राप्त है।

संवैधानिक आधार:

  • अनुच्छेद 13: मूल अधिकारों से असंगत विधि असंगति की सीमा तक शून्य होती है।

  • अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के प्रवर्तन और अन्य प्रयोजनों के लिए रिट जारी कर सकता है।

  • अनुच्छेद 227: उच्च न्यायालय को अपने क्षेत्राधिकार में स्थित न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण की शक्ति प्रदान करता है।

यदि किसी केंद्रीय विधि से मूल अधिकारों का उल्लंघन होता है, विधायी क्षमता का अभाव है अथवा किसी अन्य संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन होता है, तो उच्च न्यायालय उस विधि को असंवैधानिक घोषित कर सकता है।

बयालीसवाँ और तैंतालीसवाँ संशोधन

बयालीसवें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने:

  • अनुच्छेद 131A जोड़कर केंद्रीय विधियों की संवैधानिक वैधता पर निर्णय करने की विशिष्ट अधिकारिता उच्चतम न्यायालय को दी थी।

  • अनुच्छेद 226A जोड़कर उच्च न्यायालयों को केंद्रीय विधियों की संवैधानिक वैधता पर विचार करने से रोका था।

लेकिन तैंतालीसवें संविधान संशोधन अधिनियम, 1977 ने अनुच्छेद 131A और 226A को निरस्त कर दिया तथा उच्च न्यायालयों की पूर्व न्यायिक पुनर्विलोकन शक्ति पुनर्स्थापित कर दी।

अतः वर्तमान संवैधानिक स्थिति में उच्च न्यायालय केंद्रीय विधि को असंवैधानिक घोषित कर सकता है।

कथन 2 गलत है

संविधान के अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद को संविधान संशोधित करने की शक्ति प्राप्त है। लेकिन यह शक्ति असीमित नहीं है।

केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में उच्चतम न्यायालय ने निर्धारित किया कि:

  • संसद संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है।

  • लेकिन वह संविधान की मूल संरचना—Basic Structure को नष्ट या क्षतिग्रस्त नहीं कर सकती।

  • उच्चतम न्यायालय यह जाँच सकता है कि कोई संविधान संशोधन मूल संरचना का उल्लंघन करता है या नहीं।

मूल संरचना के कुछ मान्य तत्त्व हैं:

  • संविधान की सर्वोच्चता;

  • गणतांत्रिक और लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था;

  • धर्मनिरपेक्षता;

  • संघवाद;

  • शक्तियों का पृथक्करण;

  • विधि का शासन;

  • न्यायिक पुनर्विलोकन; तथा

  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता।

बयालीसवें संविधान संशोधन ने अनुच्छेद 368 में खंड (4) और (5) जोड़कर संविधान संशोधनों को न्यायिक पुनर्विलोकन से बाहर करने और संसद की संशोधन शक्ति को असीमित घोषित करने का प्रयास किया था। उच्चतम न्यायालय ने मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में इन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित कर दिया।

अतः उच्चतम न्यायालय संविधान संशोधन की समीक्षा कर सकता है और मूल संरचना का उल्लंघन होने पर उसे निरस्त कर सकता है।

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