JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2021

Previous Year Question

भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. न्यायिक अभिरक्षा का अर्थ है कि अभियुक्त संबंधित मजिस्ट्रेट की अभिरक्षा में है और ऐसे अभियुक्त को पुलिस थाने के हवालात में रखा जाता है, न कि जेल में।

  2. न्यायिक अभिरक्षा के दौरान मामले के प्रभारी पुलिस अधिकारी को न्यायालय की अनुमति के बिना संदिग्ध से पूछताछ करने की अनुमति नहीं होती।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

केवल 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

न तो 1, न ही 2

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन 1 गलत है

न्यायिक अभिरक्षा में अभियुक्त न्यायालय अथवा मजिस्ट्रेट के नियंत्रण में होता है और सामान्यतः उसे जेल या न्यायिक कारागार में रखा जाता है, पुलिस थाने के हवालात में नहीं।

पुलिस अभिरक्षा और न्यायिक अभिरक्षा का अंतर:

  • पुलिस अभिरक्षा: अभियुक्त पुलिस के प्रत्यक्ष नियंत्रण में रहता है और सामान्यतः पुलिस हवालात में रखा जाता है। पुलिस उससे जाँच के उद्देश्य से पूछताछ कर सकती है।

  • न्यायिक अभिरक्षा: अभियुक्त मजिस्ट्रेट के आदेश से जेल भेजा जाता है और जेल प्राधिकारियों की भौतिक अभिरक्षा में रहता है। उसका विधिक नियंत्रण न्यायालय के पास होता है।

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 167 के अनुसार, यदि जाँच 24 घंटे के भीतर पूरी नहीं हो सकती, तो गिरफ्तार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक था। मजिस्ट्रेट परिस्थितियों के अनुसार पुलिस अथवा न्यायिक अभिरक्षा अधिकृत कर सकता था।

इसलिए अभियुक्त को पुलिस थाने के हवालात में रखना पुलिस अभिरक्षा की विशेषता है, न्यायिक अभिरक्षा की नहीं।

कथन 2 सही है

न्यायिक अभिरक्षा में अभियुक्त पुलिस के प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं होता। इसलिए पुलिस को उससे पूछताछ करने के लिए न्यायालय या संबंधित मजिस्ट्रेट की अनुमति प्राप्त करनी होती है।

  • पुलिस अभियुक्त से अपनी इच्छा से जेल में जाकर पूछताछ नहीं कर सकती।

  • जाँच अधिकारी को न्यायालय के समक्ष पूछताछ की आवश्यकता और आधार प्रस्तुत करना होता है।

  • न्यायालय अनुमति देते समय पूछताछ की अवधि, स्थान और आवश्यक सुरक्षा-शर्तें निर्धारित कर सकता है।

  • न्यायालय की अनुमति मिलने पर न्यायिक अभिरक्षा में भी पूछताछ की जा सकती है; न्यायिक अभिरक्षा का अर्थ पूछताछ पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

अभिरक्षा से संबंधित संवैधानिक सुरक्षा

अनुच्छेद 22 गिरफ्तार व्यक्ति को प्रमुख संरक्षण देता है:

  • गिरफ्तारी के कारणों की सूचना पाने का अधिकार।

  • अपनी पसंद के विधि-व्यवसायी से परामर्श और प्रतिरक्षा कराने का अधिकार।

  • गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का अधिकार।

  • मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना 24 घंटे से अधिक अभिरक्षा में न रखे जाने का संरक्षण; इसमें यात्रा के लिए आवश्यक समय शामिल नहीं होता।

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