JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2023

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. यदि भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया जाता है, तो ऐसे निर्णय की तारीख से पूर्व राष्ट्रपति के पद के कर्तव्यों के निष्पादन में उनके द्वारा किए गए सभी कृत्य अविधिमान्य हो जाते हैं।

  2. भारत के राष्ट्रपति के पद के लिए निर्वाचन इस आधार पर मुल्तवी किया जा सकता है कि कुछ विधान सभाएँ विघटित हो गई हैं और उनके निर्वाचन अभी होने शेष हैं।

  3. जब कोई विधेयक भारत के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो संविधान राष्ट्रपति द्वारा अपनी अनुमति दिए जाने हेतु समय-सीमा निर्धारित करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

A.

केवल एक

B.

केवल दो

C.

सभी तीन

D.

कोई नहीं

Correct Answer: D

Detailed Solution

कथन 1 गलत है

संविधान के अनुच्छेद 71(1) के अनुसार राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न अथवा संबंधित सभी शंकाओं और विवादों का निर्णय उच्चतम न्यायालय करता है तथा उसका निर्णय अंतिम होता है।

लेकिन अनुच्छेद 71(2) स्पष्ट करता है कि यदि किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति अथवा उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन उच्चतम न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया जाता है, तो निर्णय की तारीख से पहले उसके द्वारा अपने पद की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग में किए गए कृत्य अविधिमान्य नहीं होते।

इस प्रावधान का उद्देश्य:

  • संवैधानिक एवं प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना;

  • राष्ट्रपति द्वारा पूर्व में की गई नियुक्तियों, अनुमतियों और अन्य संवैधानिक कार्यों को सुरक्षित रखना; तथा

  • निर्वाचन विवाद के कारण शासन में कानूनी अनिश्चितता उत्पन्न होने से रोकना है।

अतः पूर्व में किए गए सभी कृत्य वैध बने रहते हैं।

कथन 2 गलत है

कुछ राज्य विधान सभाओं के विघटित होने या उनके निर्वाचन लंबित होने के आधार पर राष्ट्रपति का निर्वाचन स्थगित नहीं किया जा सकता।

अनुच्छेद 71(4) के अनुसार राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन को निर्वाचक मंडल में किसी भी कारण से रिक्ति होने के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।

राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में शामिल होते हैं:

  • संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य;

  • राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य; तथा

  • राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली और पुदुचेरी की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य।

किसी विधान सभा के विघटन से उसके निर्वाचित सदस्य उपलब्ध नहीं रहते, लेकिन इससे राष्ट्रपति का निर्वाचन मुल्तवी करना आवश्यक नहीं होता।

अनुच्छेद 62 के अनुसार वर्तमान राष्ट्रपति की पदावधि समाप्त होने से उत्पन्न रिक्ति को भरने वाला निर्वाचन पदावधि समाप्त होने से पहले पूरा किया जाना चाहिए।

कथन 3 गलत है

संविधान का अनुच्छेद 111 राष्ट्रपति द्वारा संसद से पारित विधेयकों पर अनुमति से संबंधित है, लेकिन यह राष्ट्रपति के निर्णय के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं करता।

राष्ट्रपति:

  • विधेयक पर अनुमति दे सकता है;

  • अनुमति रोक सकता है; अथवा

  • यदि वह धन विधेयक नहीं है, तो उसे पुनर्विचार के लिए संसद को वापस भेज सकता है।

यदि संसद विधेयक को पुनः पारित करके राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करती है, तो राष्ट्रपति उस पर अनुमति नहीं रोक सकता।

संबंधित तथ्य:

  • धन विधेयक को राष्ट्रपति पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकता।

  • संविधान संशोधन विधेयक को दोनों सदनों द्वारा अनुच्छेद 368 के अनुसार पारित किए जाने और राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने पर राष्ट्रपति को अनुमति देनी होती है।

  • साधारण विधेयक पर निर्णय लेने के लिए अनुच्छेद 111 में कोई समय-सीमा नहीं है।

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