JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2020

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

कथन I: भारत के उच्चतम न्यायालय ने कुछ निर्णयों में यह माना है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(4) के अधीन बनाई गई आरक्षण नीतियाँ प्रशासन की दक्षता बनाए रखने के लिए अनुच्छेद 335 द्वारा सीमित होंगी।

कथन II: भारत के संविधान का अनुच्छेद 335 ‘प्रशासन की दक्षता’ पद को परिभाषित करता है।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?

A.

कथन I और कथन II दोनों सही हैं तथा कथन II, कथन I की सही व्याख्या है।

B.

कथन I और कथन II दोनों सही हैं, किंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है।

C.

कथन I सही है, किंतु कथन II गलत है।

D.

कथन I गलत है, किंतु कथन II सही है।

Correct Answer: C

Detailed Solution

कथन I सही है

अनुच्छेद 16(4) राज्य को नागरिकों के ऐसे पिछड़े वर्ग के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण की व्यवस्था करने में सक्षम बनाता है, जिसका राज्य की राय में राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

दूसरी ओर, अनुच्छेद 335 उपबंध करता है कि संघ अथवा राज्य के कार्यकलापों से संबंधित सेवाओं और पदों पर नियुक्तियाँ करते समय अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के दावों को प्रशासन की दक्षता बनाए रखने की संगति में ध्यान में रखा जाएगा।

उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में आरक्षण संबंधी प्रावधानों और अनुच्छेद 335 को साथ पढ़ते हुए माना है कि:

  • आरक्षण प्रदान करने की राज्य की शक्ति असीमित नहीं है।

  • पर्याप्त प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के साथ प्रशासनिक दक्षता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

  • आरक्षण की नीति संवैधानिक सीमाओं और समानता के व्यापक ढाँचे के अनुरूप होनी चाहिए।

  • आरक्षण लागू करते समय राज्य को यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रशासन की समग्र दक्षता अनुचित रूप से प्रभावित न हो।

एम. नागराज बनाम भारत संघ (2006) में उच्चतम न्यायालय ने आरक्षण-इन-प्रमोशन से संबंधित संवैधानिक संशोधनों को वैध माना, लेकिन राज्य को अपर्याप्त प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक दक्षता जैसे संवैधानिक मानकों का पालन करने के लिए कहा।

बाद में जरनैल सिंह बनाम लक्ष्मी नारायण गुप्ता (2018) में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के पिछड़ेपन पर अलग से परिमाणात्मक आँकड़े एकत्र करना आवश्यक नहीं है; फिर भी अपर्याप्त प्रतिनिधित्व और अनुच्छेद 335 के अंतर्गत प्रशासनिक दक्षता की आवश्यकता प्रासंगिक रहती है।

कथन II गलत है

अनुच्छेद 335 “प्रशासन की दक्षता” की कोई निश्चित अथवा विस्तृत परिभाषा नहीं देता।

यह केवल संवैधानिक सिद्धांत निर्धारित करता है कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावों पर विचार प्रशासन की दक्षता बनाए रखने की संगति में किया जाना चाहिए।

अतः:

  • अनुच्छेद 335 में प्रशासनिक दक्षता का उल्लेख है।

  • लेकिन उसमें दक्षता के मापदंड, संकेतक या संपूर्ण परिभाषा नहीं दी गई है।

  • दक्षता का मूल्यांकन पद की प्रकृति, सेवा की आवश्यकता, योग्यता-मानकों और प्रशासनिक उत्तरदायित्व जैसे कारकों के संदर्भ में किया जाता है।

अनुच्छेद 335 का परंतुक

बयासीवें संविधान संशोधन अधिनियम, 2000 द्वारा अनुच्छेद 335 में एक परंतुक जोड़ा गया। यह राज्य को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के पक्ष में पदोन्नति में आरक्षण के लिए:

  • अर्हक अंकों में छूट देने; अथवा

  • मूल्यांकन के मानकों को कम करने

संबंधी प्रावधान बनाने से नहीं रोकता।

इस प्रकार संविधान सामाजिक न्याय और प्रशासनिक दक्षता के बीच संतुलन स्थापित करता है। कथन I सही है, लेकिन अनुच्छेद 335 दक्षता को परिभाषित नहीं करता; इसलिए कथन II गलत है।

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