Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सी किसी राज्य के राज्यपाल को दी गई विवेकाधीन शक्तियाँ हैं?
भारत के राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन अधिरोपित करने के लिए रिपोर्ट भेजना।
मंत्रियों की नियुक्ति करना।
राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कुछ विधेयकों को भारत के राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखना।
राज्य सरकार का कार्य संचालन करने के लिए नियम बनाना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
1 और 2
1 और 3
2, 3 और 4
ये सभी
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 सही है—यह राज्यपाल की विवेकाधीन शक्ति है।
संविधान के अनुच्छेद 356(1) के अनुसार, यदि राष्ट्रपति को राज्यपाल से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर अथवा अन्यथा यह समाधान हो जाता है कि राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती, तो राष्ट्रपति उद्घोषणा जारी कर सकता है।
राज्यपाल राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने की स्थिति का आकलन करके राष्ट्रपति को प्रतिवेदन भेज सकता है।
ऐसा प्रतिवेदन राज्य मंत्रिपरिषद् की सलाह के बिना भी भेजा जा सकता है।
राज्यपाल का प्रतिवेदन राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए अनिवार्य नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 356 में “राज्यपाल से प्रतिवेदन मिलने पर या अन्यथा” का प्रावधान है।
अंतिम निर्णय राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय मंत्रिपरिषद् की सहायता और सलाह पर लिया जाता है।
कथन 2 गलत है—सभी मंत्रियों की नियुक्ति विवेकाधीन नहीं है।
संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अनुसार:
मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है।
अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है।
त्रिशंकु विधान सभा जैसी स्थिति में मुख्यमंत्री के चयन में राज्यपाल को सीमित विवेक प्राप्त हो सकता है। लेकिन अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है। इसलिए सामान्य रूप से “मंत्रियों की नियुक्ति” को राज्यपाल की विवेकाधीन शक्ति नहीं कहा जा सकता।
कथन 3 सही है—यह राज्यपाल की विवेकाधीन शक्ति है।
संविधान के अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यपाल के समक्ष राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक प्रस्तुत किए जाने पर वह:
विधेयक पर अनुमति दे सकता है;
अनुमति रोक सकता है;
गैर-धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है; अथवा
विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख सकता है।
यदि किसी विधेयक के कानून बनने से उच्च न्यायालय की शक्तियों का ऐसा अल्पीकरण होता हो जिससे न्यायालय की संवैधानिक स्थिति संकट में पड़ जाए, तो राज्यपाल के लिए उसे राष्ट्रपति के विचार हेतु आरक्षित रखना आवश्यक है।
राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित विधेयक पर अनुच्छेद 201 लागू होता है। राष्ट्रपति उस पर अनुमति दे सकता है या अनुमति रोक सकता है। गैर-धन विधेयक की स्थिति में राष्ट्रपति राज्यपाल को उसे विधानमंडल के पुनर्विचार के लिए वापस भेजने का निर्देश भी दे सकता है।
कथन 4 गलत है—यह विवेकाधीन शक्ति नहीं है।
अनुच्छेद 166(3) के अनुसार, राज्यपाल राज्य सरकार के कार्य को अधिक सुविधापूर्वक चलाने और मंत्रियों के बीच कार्य आवंटित करने के लिए नियम बनाता है।
लेकिन यह कार्य सामान्यतः मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद् की सहायता और सलाह पर किया जाता है। नियम राज्यपाल के नाम से बनाए जाते हैं, परंतु केवल इसी कारण वे उसकी व्यक्तिगत विवेकाधीन शक्ति नहीं बन जाते।