Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
भारत में किसी राज्य की विधान परिषद् उस विशेष राज्य की विधान सभा के आधे से अधिक बड़े आकार की हो सकती है।
किसी राज्य का राज्यपाल उस विशेष राज्य की विधान परिषद् के सभापति को नामनिर्देशित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन 1 गलत है।
संविधान के अनुच्छेद 171(1) के अनुसार, किसी राज्य की विधान परिषद् के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती।
इसके साथ ही विधान परिषद् के सदस्यों की कुल संख्या 40 से कम नहीं हो सकती। इसलिए विधान परिषद् का आकार विधान सभा के आधे से अधिक नहीं हो सकता।
विधान परिषद् की संरचना—अनुच्छेद 171(3):
विधान परिषद् के सदस्यों का निर्वाचन अथवा नामनिर्देशन निम्न प्रकार से होता है:
लगभग एक-तिहाई सदस्य नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों और अन्य निर्दिष्ट स्थानीय प्राधिकरणों के निर्वाचक मंडलों द्वारा चुने जाते हैं।
लगभग एक-बारहवाँ भाग राज्य में कम-से-कम तीन वर्ष से निवास करने वाले स्नातकों के निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है।
लगभग एक-बारहवाँ भाग माध्यमिक स्तर से नीचे न होने वाली शिक्षण संस्थाओं में कम-से-कम तीन वर्ष से अध्यापन करने वाले व्यक्तियों द्वारा चुना जाता है।
लगभग एक-तिहाई सदस्य राज्य विधान सभा के सदस्यों द्वारा उन व्यक्तियों में से चुने जाते हैं जो स्वयं विधान सभा के सदस्य नहीं हैं।
शेष सदस्य, अर्थात लगभग एक-छठा भाग, राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित किया जाता है।
राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित सदस्यों को साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन अथवा समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।
कथन 2 गलत है।
संविधान के अनुच्छेद 182 के अनुसार, विधान परिषद् स्वयं अपने सदस्यों में से दो सदस्यों को क्रमशः अपना सभापति और उपसभापति चुनती है।
अतः:
राज्यपाल विधान परिषद् के लगभग एक-छठे सदस्यों को नामनिर्देशित करता है।
राज्यपाल विधान परिषद् के सभापति को नामनिर्देशित अथवा नियुक्त नहीं करता।
सभापति और उपसभापति का निर्वाचन विधान परिषद् के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
विधान परिषद् से संबंधित अन्य तथ्य:
संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद् का सृजन अथवा उन्मूलन कानून द्वारा कर सकती है।
इसके लिए संबंधित राज्य की विधान सभा को अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करना होता है।
अनुच्छेद 169 के अंतर्गत बनाया गया ऐसा कानून अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए संविधान संशोधन नहीं माना जाता।
विधान परिषद् एक स्थायी सदन है; इसका विघटन नहीं होता। इसके लगभग एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं।