Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
किसी राज्य में मुख्य सचिव को उस राज्य के राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाता है।
किसी राज्य के मुख्य सचिव का नियत कार्यकाल होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन 1 गलत है।
मुख्य सचिव की नियुक्ति राज्यपाल की व्यक्तिगत अथवा विवेकाधीन संवैधानिक शक्ति नहीं है। मुख्य सचिव का चयन और पदस्थापन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है तथा व्यवहार में मुख्यमंत्री इस चयन में प्रमुख भूमिका निभाता है।
मुख्य सचिव सामान्यतः भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक वरिष्ठ अधिकारी होता है। सबसे वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त करना अनिवार्य नहीं है; वरिष्ठता के साथ अनुभव, सेवा-अभिलेख और राज्य सरकार का विश्वास भी महत्त्वपूर्ण होते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 166 के अनुसार राज्य सरकार की कार्यपालिका संबंधी कार्रवाइयाँ राज्यपाल के नाम से की जाती हैं। इसलिए मुख्य सचिव की नियुक्ति का औपचारिक आदेश राज्यपाल के नाम से जारी हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राज्यपाल अपने विवेक से मुख्य सचिव का चयन करता है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (संवर्ग) नियम, 1954 के अंतर्गत राज्य संवर्ग के पदों पर संवर्ग अधिकारियों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है।
मुख्य सचिव राज्य प्रशासन में:
राज्य का सर्वोच्च पदस्थ लोक सेवक होता है।
राज्य सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख होता है।
मंत्रिमंडल का सचिव तथा मुख्यमंत्री का प्रमुख प्रशासनिक सलाहकार होता है।
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
राज्य और केंद्र सरकार के बीच प्रशासनिक संपर्क की महत्त्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है।
कथन 2 गलत है।
मुख्य सचिव के लिए संविधान में कोई निश्चित और समान कार्यकाल निर्धारित नहीं है।
मुख्य सचिव तब तक पद पर रहता है जब तक राज्य सरकार उसे उस पद पर बनाए रखती है।
अधिकारी का स्थानांतरण किया जा सकता है, उसे किसी अन्य पद पर नियुक्त किया जा सकता है अथवा सेवानिवृत्ति के कारण उसका कार्यकाल समाप्त हो सकता है।
सेवा अथवा संवर्ग नियमों और सरकारी नीतियों में कुछ पदों के लिए न्यूनतम पदस्थापन अवधि की व्यवस्था हो सकती है, लेकिन इससे मुख्य सचिव को संवैधानिक पदों जैसा निश्चित कार्यकाल प्राप्त नहीं होता।
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग ने मुख्य सचिव के लिए पर्याप्त स्थिर कार्यकाल की सिफारिश की थी, लेकिन ऐसी सिफारिश स्वयं वैधानिक रूप से निश्चित कार्यकाल नहीं बनाती।