JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2018

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. किसी राज्य के राज्यपाल के विरुद्ध उसकी पदावधि के दौरान किसी न्यायालय में कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी।

  2. किसी राज्य के राज्यपाल की परिलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएँगे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

केवल 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

न तो 1, न ही 2

Correct Answer: C

Detailed Solution

कथन 1 सही है।

संविधान का अनुच्छेद 361 राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों को उनके पद की अवधि के दौरान कुछ न्यायिक संरक्षण प्रदान करता है।

अनुच्छेद 361(2) के अनुसार, राष्ट्रपति अथवा किसी राज्य के राज्यपाल के विरुद्ध उसकी पदावधि के दौरान किसी न्यायालय में किसी प्रकार की दांडिक कार्यवाही न तो संस्थित की जा सकती है और न ही जारी रखी जा सकती है।

इससे संबंधित अन्य संरक्षण हैं:

  • अनुच्छेद 361(3) के अनुसार, राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल की पदावधि के दौरान उसकी गिरफ्तारी या कारावास के लिए किसी न्यायालय से कोई आदेशिका जारी नहीं की जा सकती।

  • अनुच्छेद 361(1) के अनुसार, राष्ट्रपति या राज्यपाल अपनी संवैधानिक शक्तियों एवं कर्तव्यों के प्रयोग और पालन के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होता।

  • यह संरक्षण स्थायी आपराधिक उन्मुक्ति नहीं है। पदावधि समाप्त होने के बाद विधि के अनुसार दांडिक कार्यवाही की जा सकती है।

  • राज्यपाल द्वारा अपनी व्यक्तिगत हैसियत में किए गए किसी कार्य के संबंध में सिविल कार्यवाही उसकी पदावधि के दौरान की जा सकती है, लेकिन अनुच्छेद 361(4) के अनुसार इसके लिए कम-से-कम दो महीने पहले लिखित सूचना देना आवश्यक है।

कथन 2 सही है।

संविधान के अनुच्छेद 158(4) के अनुसार, राज्यपाल की परिलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएँगे।

अनुच्छेद 158 से संबंधित अन्य तथ्य:

  • राज्यपाल अपने पद के कारण बिना किराया दिए शासकीय निवास के उपयोग का अधिकारी होता है।

  • राज्यपाल की परिलब्धियाँ, भत्ते और विशेषाधिकार संसद द्वारा विधि के माध्यम से निर्धारित किए जाते हैं।

  • जब तक संसद इस संबंध में व्यवस्था नहीं करती, तब तक दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट प्रावधान लागू होते हैं।

  • यदि एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, तो उसके वेतन और भत्तों का राज्यों के बीच आवंटन राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाता है।

  • राज्यपाल संसद अथवा किसी राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं हो सकता तथा कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं कर सकता।

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