Previous Year Question
निम्नलिखित में से किसने यह सुझाव दिया था कि राज्यपाल को राज्य के बाहर का कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति होना चाहिए और उसे ऐसा तटस्थ व्यक्ति होना चाहिए जिसके गहरे राजनीतिक संबंध न हों अथवा जिसने हाल के समय में राजनीति में भाग न लिया हो?
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966)
राजमन्नार समिति (1969)
सरकारिया आयोग (1983)
संविधान के कार्यकरण की समीक्षा हेतु राष्ट्रीय आयोग (2000)
Correct Answer: C
Detailed Solution
यह सुझाव सरकारिया आयोग ने दिया था।
केंद्र सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए जून 1983 में न्यायमूर्ति रणजीत सिंह सरकारिया की अध्यक्षता में सरकारिया आयोग गठित किया था।
आयोग के अन्य दो सदस्य बी. शिवरामन तथा डॉ. एस. आर. सेन थे।
आयोग ने 1988 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
राज्यपाल के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्ति के संबंध में आयोग ने प्रमुख रूप से सुझाव दिया कि वह:
जीवन के किसी क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति हो।
संबंधित राज्य के बाहर का व्यक्ति हो।
तटस्थ व्यक्तित्व वाला हो तथा राज्य की स्थानीय राजनीति से अत्यधिक निकटता से जुड़ा न हो।
सामान्य राजनीति में, विशेषतः हाल के समय में, अत्यधिक सक्रिय न रहा हो।
यदि केंद्र और राज्य में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें हों, तो केंद्र में सत्तारूढ़ दल से सक्रिय रूप से जुड़ा व्यक्ति राज्यपाल नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।
राज्यपाल की नियुक्ति से संबंधित संवैधानिक स्थिति:
अनुच्छेद 155: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है।
अनुच्छेद 156: राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है; उसका सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष है।
अनुच्छेद 157: राज्यपाल बनने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना तथा कम-से-कम 35 वर्ष की आयु पूरी करना आवश्यक है।
अनुच्छेद 158: राज्यपाल संसद या किसी राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं हो सकता और किसी अन्य लाभ के पद पर नहीं रह सकता।
सरकारिया आयोग द्वारा बताए गए मापदंड संविधान में उल्लिखित औपचारिक अर्हताएँ नहीं हैं। ये राज्यपाल के पद की निष्पक्षता और संघीय विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सुझाए गए मानदंड एवं स्वस्थ संवैधानिक परंपराएँ हैं।
अन्य विकल्प सही क्यों नहीं हैं:
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग ने प्रशासनिक सुधारों और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े विषयों पर विचार किया था, लेकिन प्रश्न में दिया गया विशिष्ट सुझाव उससे संबद्ध नहीं है।
राजमन्नार समिति का गठन तमिलनाडु सरकार ने 1969 में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए किया था।
संविधान के कार्यकरण की समीक्षा हेतु राष्ट्रीय आयोग का गठन 2000 में न्यायमूर्ति एम. एन. वेंकटचलैया की अध्यक्षता में हुआ था। उसने भी राज्यपाल से संबंधित सुझाव दिए, परंतु प्रश्न में उद्धृत मापदंड मूलतः सरकारिया आयोग से संबंधित हैं।