Previous Year Question
भारत में किसी राज्य की विधान सभा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारंभ में राज्यपाल सदन के सदस्यों के लिए रूढ़िगत संबोधन करता है।
जब किसी राज्य विधानमंडल के पास किसी विशेष विषय पर कोई नियम नहीं होता, तो वह उस विषय पर लोक सभा के नियम का पालन करता है।
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन 1 सही है।
संविधान के अनुच्छेद 176(1) के अनुसार, राज्यपाल निम्नलिखित अवसरों पर विधान सभा को अथवा द्विसदनीय विधानमंडल की स्थिति में दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करता है:
विधान सभा के प्रत्येक साधारण निर्वाचन के बाद आयोजित प्रथम सत्र के प्रारंभ में।
प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारंभ में।
इस अभिभाषण में राज्यपाल विधानमंडल को उसके आह्वान के कारणों से अवगत कराता है।
राज्यपाल का अभिभाषण संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। इसमें सामान्यतः राज्य सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और विधायी कार्यसूची का उल्लेख होता है।
अनुच्छेद 176(2) के अनुसार, सदन की प्रक्रिया के नियमों में अभिभाषण में उल्लिखित विषयों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित करने का प्रावधान किया जाता है। व्यवहार में यह चर्चा धन्यवाद प्रस्ताव के माध्यम से होती है।
इसे अनुच्छेद 175 से अलग समझना चाहिए। अनुच्छेद 175 राज्यपाल को किसी भी समय सदन अथवा दोनों सदनों को संबोधित करने तथा संदेश भेजने का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 176 विशेष अवसरों पर होने वाले अभिभाषण से संबंधित है।
कथन 2 गलत है।
संविधान के अनुच्छेद 208(1) के अनुसार, राज्य विधानमंडल का प्रत्येक सदन अपनी प्रक्रिया और कार्य-संचालन को विनियमित करने के लिए अपने नियम बना सकता है।
यदि किसी विषय पर नियम उपलब्ध नहीं है, तो राज्य विधानमंडल के लिए लोक सभा के नियमों का स्वतः पालन करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है।
अनुच्छेद 208(2) में संक्रमणकालीन व्यवस्था दी गई है। नए नियम बनाए जाने तक संविधान लागू होने से ठीक पहले संबंधित प्रांतीय विधानमंडल में प्रभावी प्रक्रिया-नियम और स्थायी आदेश आवश्यक अनुकूलनों तथा संशोधनों के साथ लागू रह सकते थे।
अध्यक्ष अथवा सभापति सदन के अपने नियमों, स्थापित परंपराओं, पूर्व निर्णयों तथा निर्देशों के आधार पर प्रक्रिया संबंधी प्रश्न का समाधान कर सकते हैं। लोक सभा की प्रक्रिया से मार्गदर्शन लिया जा सकता है, लेकिन उसके नियम अपने-आप राज्य विधानमंडल पर लागू नहीं होते।
अनुच्छेद 209 राज्य विधानमंडल को वित्तीय कार्य समय पर पूरा कराने के लिए अपनी प्रक्रिया को कानून द्वारा विनियमित करने की शक्ति भी देता है।