Previous Year Question
भारत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
जब कोई कैदी पर्याप्त आधार प्रस्तुत करता है, तो ऐसे कैदी को पैरोल देने से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह उसके अधिकार का विषय बन जाता है।
राज्य सरकारों के अपने कैदी पैरोल पर रिहाई नियम हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 सही नहीं है
पैरोल किसी कैदी का निरपेक्ष अथवा स्वतः प्राप्त अधिकार नहीं है। यह सक्षम प्राधिकारी द्वारा संबंधित राज्य के कानूनों, नियमों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर दी जाने वाली सशर्त अस्थायी रिहाई है।
कैदी पैरोल के लिए आवेदन और अपने मामले पर निष्पक्ष विचार किए जाने का दावा कर सकता है, लेकिन पर्याप्त आधार प्रस्तुत करने मात्र से पैरोल देना अनिवार्य नहीं हो जाता।
पैरोल पर निर्णय करते समय निम्न बातों पर विचार किया जा सकता है—
अपराध की प्रकृति और गंभीरता
कारागार में कैदी का आचरण
रिहाई का उद्देश्य, जैसे गंभीर बीमारी, मृत्यु, विवाह या पारिवारिक आवश्यकता
फरार होने की आशंका
साक्षियों या पीड़ितों को प्रभावित करने की संभावना
लोक-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा पर प्रभाव
पुलिस तथा जिला प्रशासन का प्रतिवेदन
पहले दी गई पैरोल की शर्तों का अनुपालन
इसलिए सक्षम प्राधिकारी नियमों के अनुसार उचित कारणों से पैरोल अस्वीकार कर सकता है। निर्णय मनमाना नहीं होना चाहिए, लेकिन पैरोल को अनिवार्य अधिकार नहीं माना जा सकता।
कथन 2 सही है
संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 4 में कारागार और उनमें निरुद्ध व्यक्ति सम्मिलित हैं। इसलिए कारागार प्रशासन तथा पैरोल संबंधी नियम मुख्यतः राज्य सरकारों के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं।
राज्य सरकारों के अपने—
कैदी पैरोल पर रिहाई नियम
कारागार नियम
कारागार नियमावलियां
फर्लो और समयपूर्व रिहाई संबंधी नीतियां
हो सकती हैं। इसलिए पात्रता, अवधि, प्रक्रिया और शर्तें अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकती हैं।
पैरोल और फर्लो में अंतर
पैरोल
सामान्यतः किसी विशिष्ट और तत्काल कारण से दी जाने वाली अस्थायी रिहाई है।
इसके लिए कैदी को कारण प्रस्तुत करना होता है।
यह सार्वजनिक सुरक्षा और निर्धारित शर्तों के अधीन होती है।
फर्लो
सामान्यतः दीर्घकालीन कैदियों को कारागार जीवन की एकरसता तोड़ने और सामाजिक संबंध बनाए रखने के लिए दी जाने वाली आवधिक रिहाई है।
इसकी पात्रता और अवधि संबंधित राज्य के नियमों पर निर्भर करती है।
केंद्र सरकार की भूमिका
कारागार राज्य विषय होने के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय आदर्श नियमावली और परामर्श जारी कर सकता है, लेकिन राज्यों के पैरोल नियमों को सीधे प्रतिस्थापित नहीं करता। राज्यों को अपने कानूनों और नियमों के अनुसार उन्हें अपनाना होता है।