Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: भारत में, राज्य सरकारों को गौण खनिजों के निष्कर्षण के संबंध में रियायतें प्रदान करने के लिए नियम बनाने की कोई शक्ति नहीं है, भले ही ऐसे खनिज उनके राज्यक्षेत्रों में अवस्थित हों।
कथन-II: भारत में, सुसंगत विधि के अधीन गौण खनिजों को अधिसूचित करने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है।
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, किंतु कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता है।
कथन-I सही है, किंतु कथन-II सही नहीं है।
कथन-I सही नहीं है, किंतु कथन-II सही है।
Correct Answer: D
Detailed Solution
गौण खनिजों से संबंधित शक्तियां खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957—MMDR Act में निर्धारित हैं।
इस अधिनियम के अंतर्गत—
किसी खनिज को “गौण खनिज” घोषित या अधिसूचित करने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है।
गौण खनिजों के लिए खनिज रियायतें प्रदान करने और उनसे संबंधित नियम बनाने की शक्ति राज्य सरकारों के पास है।
इसलिए कथन-I गलत और कथन-II सही है।
कथन-I सही नहीं है
MMDR अधिनियम की धारा 15(1) राज्य सरकार को गौण खनिजों के संबंध में नियम बनाने की शक्ति प्रदान करती है।
राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा निम्न विषयों को विनियमित करने के लिए नियम बना सकती है—
उत्खनन पट्टे प्रदान करना
खनन पट्टे प्रदान करना
अन्य प्रकार की खनिज रियायतें देना
आवेदन की प्रक्रिया और शर्तें निर्धारित करना
रॉयल्टी, नियत किराया तथा अन्य प्रभार निर्धारित करना
खनन क्षेत्र, अवधि और पट्टे की शर्तें निर्धारित करना
गौण खनिजों के परिवहन और भंडारण का विनियमन
अतः यह कहना गलत है कि राज्य सरकारों को अपने क्षेत्र में स्थित गौण खनिजों के निष्कर्षण के लिए रियायतों से संबंधित नियम बनाने की कोई शक्ति नहीं है।
कथन-II सही है
MMDR अधिनियम की धारा 3(e) गौण खनिज को परिभाषित करती है। इसमें भवन-निर्माण पत्थर, बजरी, साधारण मिट्टी, साधारण बालू और अधिनियम में उल्लिखित अन्य खनिज शामिल हैं।
इसी धारा के अंतर्गत केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी करके किसी अन्य खनिज को भी गौण खनिज घोषित कर सकती है।
अतः—
खनिज को गौण खनिज के रूप में अधिसूचित करना—केंद्र सरकार की शक्ति।
अधिसूचित गौण खनिजों की रियायतों और पट्टों के लिए नियम बनाना—राज्य सरकार की शक्ति।
संवैधानिक आधार
सातवीं अनुसूची में—
राज्य सूची की प्रविष्टि 23 खानों और खनिज विकास से संबंधित है, लेकिन यह संघ सूची की प्रविष्टि 54 के अधीन है।
संघ सूची की प्रविष्टि 54 संसद को उस सीमा तक खानों और खनिज विकास के विनियमन की शक्ति देती है, जिस सीमा तक संसद सार्वजनिक हित में संघीय नियंत्रण आवश्यक घोषित करती है।
MMDR अधिनियम इसी संघीय विधायी शक्ति के अंतर्गत बनाया गया है। अधिनियम ने गौण खनिजों के दैनिक विनियमन और रियायत संबंधी नियमों की शक्ति राज्यों को प्रदान की है, जबकि किसी खनिज को गौण खनिज घोषित करने की शक्ति केंद्र के पास रखी है।