Previous Year Question
निम्नलिखित पर विचार कीजिए :
शिक्षा का अधिकार
लोक सेवा में समान पहुँच का अधिकार
भोजन का अधिकार
उपर्युक्त में से कौन-सा/से ‘मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा’ के अंतर्गत मानव अधिकार है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 3
उपर्युक्त सभी
Correct Answer: D
Detailed Solution
शिक्षा का अधिकार, लोक सेवा में समान पहुँच का अधिकार और भोजन का अधिकार—तीनों को मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा, 1948 में मान्यता दी गई है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसंबर 1948 को पेरिस में संकल्प संख्या 217 A (III) द्वारा इस घोषणा को अंगीकार किया था। इसमें कुल 30 अनुच्छेद हैं।
1. शिक्षा का अधिकार—अनुच्छेद 26
UDHR का अनुच्छेद 26 प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।
प्रारम्भिक और बुनियादी स्तर पर शिक्षा निःशुल्क होनी चाहिए।
प्रारम्भिक शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।
तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा सामान्य रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उच्च शिक्षा योग्यता के आधार पर सभी के लिए समान रूप से सुलभ होनी चाहिए।
शिक्षा का उद्देश्य मानव व्यक्तित्व का पूर्ण विकास और मानव अधिकारों तथा मूल स्वतंत्रताओं के प्रति सम्मान बढ़ाना होना चाहिए।
माता-पिता को अपने बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा के प्रकार का चयन करने का प्राथमिक अधिकार प्राप्त है।
भारत में शिक्षा के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21A के माध्यम से 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए मौलिक अधिकार बनाया गया। इसे लागू करने के लिए निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 बनाया गया।
2. लोक सेवा में समान पहुँच—अनुच्छेद 21(2)
UDHR के अनुच्छेद 21(2) के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपने देश की लोक सेवा में समान पहुँच का अधिकार है।
इसका उद्देश्य सार्वजनिक पदों और सेवाओं तक पहुँच में मनमाने भेदभाव को रोकना तथा समान अवसर सुनिश्चित करना है।
भारतीय संविधान में इससे संबंधित व्यवस्थाएँ हैं:
अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समानता और विधियों का समान संरक्षण।
अनुच्छेद 16: राज्य के अधीन नियोजन अथवा नियुक्ति के मामलों में अवसर की समानता।
समान पहुँच का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति को सरकारी पद प्राप्त करने का अधिकार है। इसका अर्थ पात्रता, विधि और संवैधानिक व्यवस्थाओं के अधीन समान अवसर है।
3. भोजन का अधिकार—अनुच्छेद 25
UDHR का अनुच्छेद 25 प्रत्येक व्यक्ति को अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए पर्याप्त जीवन-स्तर का अधिकार देता है। इसमें शामिल हैं:
भोजन
वस्त्र
आवास
चिकित्सा देखभाल
आवश्यक सामाजिक सेवाएँ
इसी अनुच्छेद में बेरोजगारी, बीमारी, अशक्तता, वैधव्य, वृद्धावस्था अथवा आजीविका के अभाव की परिस्थितियों में सामाजिक सुरक्षा को भी मान्यता दी गई है।
भारत में भोजन और पोषण से संबंधित प्रमुख संवैधानिक एवं कानूनी व्यवस्थाएँ हैं:
अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार।
अनुच्छेद 47: राज्य का कर्तव्य है कि वह पोषण-स्तर और जनस्वास्थ्य में सुधार करे।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013: पात्र व्यक्तियों को रियायती खाद्यान्न तथा महिलाओं और बच्चों के लिए पोषण संबंधी अधिकार प्रदान करता है।
UDHR की विधिक प्रकृति
UDHR स्वयं कोई संधि नहीं है और मूल रूप से प्रत्यक्ष रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय कानून के रूप में अंगीकृत नहीं हुई थी। फिर भी इसने बाद की मानवाधिकार संधियों, राष्ट्रीय संविधानों और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों को विकसित करने में आधारभूत भूमिका निभाई।