Previous Year Question
भारत की संचित निधि से निधियों की निकासी का प्राधिकार अवश्य प्राप्त होना चाहिए
भारत के राष्ट्रपति से
भारत की संसद से
भारत के प्रधानमंत्री से
संघ के वित्त मंत्री से
Correct Answer: B
Detailed Solution
संविधान के अनुच्छेद 266(3) के अनुसार भारत की संचित निधि में से कोई धन संविधान के अनुसार और विधि द्वारा निर्धारित प्रयोजनों तथा रीति के अतिरिक्त विनियोजित नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 114(3) इसे और स्पष्ट करता है—भारत की संचित निधि से विधि द्वारा किए गए विनियोग के अधीन ही धन निकाला जा सकता है। यह विधिक प्राधिकार संसद द्वारा पारित विनियोग अधिनियम से प्राप्त होता है।
संसदीय प्राधिकार की प्रक्रिया
वार्षिक वित्तीय विवरण: अनुच्छेद 112 के अंतर्गत अनुमानित प्राप्तियाँ और व्यय संसद के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं।
अनुदानों की माँग: अनुच्छेद 113 के अनुसार मतदान योग्य व्यय को अनुदानों की माँगों के रूप में लोकसभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
लोकसभा में मतदान: लोकसभा किसी माँग को स्वीकार, अस्वीकार या उसकी राशि कम कर सकती है। राज्यसभा अनुदानों की माँगों पर मतदान नहीं करती।
विनियोग विधेयक: अनुदानों की माँगों पर मतदान के बाद अनुच्छेद 114 के अंतर्गत विनियोग विधेयक प्रस्तुत किया जाता है। इसमें:
लोकसभा द्वारा स्वीकृत अनुदान;
भारत की संचित निधि पर भारित व्यय शामिल किए जाते हैं।
विनियोग अधिनियम: संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के बाद विधेयक विनियोग अधिनियम बनता है। इसके बाद संचित निधि से धन निकालने का विधिक अधिकार मिलता है।
भारित व्यय संबंधी महत्त्वपूर्ण तथ्य
संचित निधि पर भारित व्यय लोकसभा में मतदान के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाता, लेकिन उस पर चर्चा की जा सकती है। मतदान न होने के बावजूद इसे विनियोग विधेयक में शामिल करना आवश्यक है।
भारित व्यय में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
राष्ट्रपति के वेतन, भत्ते और पद से संबंधित व्यय।
राज्यसभा के सभापति और उपसभापति तथा लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन-भत्ते।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों से संबंधित व्यय।
भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से संबंधित व्यय।
भारत सरकार के ऋण-भार और ब्याज भुगतान।
न्यायालय अथवा मध्यस्थ अधिकरण के निर्णय को पूरा करने के लिए आवश्यक धन।
इसलिए ‘मतदान न होना’ और ‘संसदीय प्राधिकार की आवश्यकता न होना’ एक ही बात नहीं हैं। भारित व्यय को भी विनियोग अधिनियम में सम्मिलित किया जाता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
राष्ट्रपति: राष्ट्रपति विनियोग विधेयक को अनुमति देता है, लेकिन वह संसद की स्वीकृति के बिना स्वतंत्र रूप से संचित निधि से धन निकालने का प्राधिकार नहीं दे सकता।
प्रधानमंत्री: प्रधानमंत्री या मंत्रिपरिषद व्यय का प्रस्ताव कर सकते हैं, लेकिन अंतिम विधिक प्राधिकार संसद के विनियोग से आता है।
वित्त मंत्री: वित्त मंत्री बजट और विनियोग विधेयक प्रस्तुत करता है, लेकिन स्वयं संचित निधि से निकासी अधिकृत नहीं कर सकता।
विशेष वित्तीय व्यवस्थाएँ
अनुच्छेद 115 के अनुपूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदान तथा अनुच्छेद 116 का लेखानुदान भी संसदीय स्वीकृति और विनियोग की प्रक्रिया के अधीन होते हैं। अत्यावश्यक अप्रत्याशित व्यय के लिए आकस्मिकता निधि से अग्रिम दिया जा सकता है, लेकिन बाद में संसद की अनुमति से इसकी प्रतिपूर्ति की जाती है।
अतः भारत की संचित निधि से धन निकालने का प्राधिकार संसद से प्राप्त होना चाहिए।