Previous Year Question
यदि राज्य सभा द्वारा धन विधेयक में सारभूत रूप से संशोधन कर दिया जाता है, तो तत्पश्चात क्या होगा?
लोक सभा, राज्य सभा की सिफारिशों को स्वीकार अथवा अस्वीकार करते हुए, विधेयक पर आगे कार्यवाही कर सकती है।
लोक सभा विधेयक पर आगे विचार नहीं कर सकती।
लोक सभा विधेयक को पुनर्विचार के लिए राज्य सभा को भेज सकती है।
राष्ट्रपति विधेयक को पारित करने के लिए दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकता है।
Correct Answer: A
Detailed Solution
राज्यसभा को धन विधेयक में औपचारिक रूप से संशोधन करने या उसे अस्वीकार करने की शक्ति नहीं है। वह धन विधेयक के संबंध में केवल सिफारिशें कर सकती है। लोकसभा इन सिफारिशों को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है।
धन विधेयक की संसदीय प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 109 में धन विधेयक के संबंध में विशेष प्रक्रिया दी गई है:
धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद इसे राज्यसभा को उसकी सिफारिशों के लिए भेजा जाता है।
राज्यसभा को विधेयक प्राप्त होने की तारीख से 14 दिनों के भीतर उसे अपनी सिफारिशों सहित लोकसभा को लौटाना होता है।
लोकसभा राज्यसभा की सभी, कुछ अथवा किसी भी सिफारिश को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
यदि लोकसभा किसी सिफारिश को स्वीकार करती है, तो विधेयक उस स्वीकार किए गए परिवर्तन सहित दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।
यदि लोकसभा राज्यसभा की सिफारिशों को स्वीकार नहीं करती, तो विधेयक लोकसभा द्वारा मूल रूप में पारित स्वरूप में ही दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।
यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर विधेयक नहीं लौटाती, तो वह 14 दिन की अवधि समाप्त होने पर लोकसभा द्वारा पारित मूल रूप में ही दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।
अतः प्रश्न में राज्यसभा द्वारा किया गया ‘संशोधन’ संवैधानिक दृष्टि से केवल एक सिफारिश है।
संबंधित संवैधानिक तथ्य
अनुच्छेद 110: धन विधेयक की परिभाषा देता है। करारोपण, सरकारी उधार, भारत की संचित निधि और लोक लेखा तथा विनियोग जैसे विषय इसमें शामिल हैं।
अनुच्छेद 110(3): किसी विधेयक के धन विधेयक होने पर विवाद की स्थिति में लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है।
अनुच्छेद 110(4): राज्यसभा को भेजते और राष्ट्रपति की अनुमति के लिए प्रस्तुत करते समय धन विधेयक पर लोकसभा अध्यक्ष का प्रमाण-पत्र अंकित किया जाता है।
अनुच्छेद 117(1): धन विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 108: धन विधेयक के लिए संसद की संयुक्त बैठक नहीं हो सकती।
अनुच्छेद 111: राष्ट्रपति धन विधेयक को संसद के पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकता। विधेयक लौटाने की शक्ति केवल गैर-धन विधेयक के संबंध में उपलब्ध है।
इसलिए राज्यसभा की सिफारिशों के बाद भी लोकसभा उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करते हुए विधेयक पर आगे कार्यवाही कर सकती है।