JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2013

Previous Year Question

संसद, अंतर्राष्ट्रीय संधियों को भारत के किसी भाग अथवा सम्पूर्ण भारत में लागू करने के लिए, कोई भी कानून बना सकती है

A.

सभी राज्यों की सहमति से

B.

बहुसंख्य राज्यों की सहमति से

C.

संबंधित राज्यों की सहमति से

D.

किसी भी राज्य की सहमति के बिना

Correct Answer: D

Detailed Solution

संविधान के अनुच्छेद 253 के अनुसार संसद को किसी अंतर्राष्ट्रीय संधि, करार, अभिसमय अथवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में किए गए विनिश्चय को लागू करने के लिए भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है।

इसके लिए संबंधित राज्य अथवा किसी भी राज्य की सहमति आवश्यक नहीं होती।

अनुच्छेद 253 की विशेषता

अनुच्छेद 253 संविधान के भाग XI के उन पूर्ववर्ती उपबंधों के बावजूद लागू होता है जो संघ और राज्यों के बीच विधायी विषयों का वितरण करते हैं। इसका अर्थ है कि अंतर्राष्ट्रीय दायित्व लागू करने के लिए संसद:

  • संघ सूची के विषय पर कानून बना सकती है।

  • समवर्ती सूची के विषय पर कानून बना सकती है।

  • आवश्यकता पड़ने पर राज्य सूची के विषय पर भी कानून बना सकती है।

  • कानून को संपूर्ण भारत या भारत के किसी निर्धारित भाग में लागू कर सकती है।

इस विशेष शक्ति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संघ सरकार भारत द्वारा स्वीकार किए गए अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को राज्यों की अलग-अलग सहमति पर निर्भर हुए बिना देश में लागू कर सके।

संबंधित संवैधानिक प्रावधान

  • संघ सूची की प्रविष्टि 14: विदेशों के साथ संधियाँ और करार करना तथा उनका क्रियान्वयन।

  • अनुच्छेद 73: संघ की कार्यपालिका शक्ति उन विषयों तक विस्तृत है जिन पर संसद कानून बना सकती है।

  • अनुच्छेद 51(c): राज्य अंतर्राष्ट्रीय विधि और संधि-दायित्वों के प्रति सम्मान बढ़ाने का प्रयास करेगा।

  • अनुच्छेद 246: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के आधार पर विधायी शक्तियों का सामान्य वितरण करता है।

  • अनुच्छेद 253: अंतर्राष्ट्रीय संधियों के कार्यान्वयन के लिए इस सामान्य वितरण से ऊपर संसद को विशेष विधायी शक्ति देता है।

संधि करना और उसे घरेलू कानून में लागू करना

अंतर्राष्ट्रीय संधि करना सामान्यतः संघ की कार्यपालिका शक्ति का भाग है। लेकिन यदि किसी संधि को लागू करने के लिए वर्तमान भारतीय कानून में परिवर्तन करना हो, नागरिकों के अधिकारों या दायित्वों को बदलना हो अथवा नया दंडात्मक प्रावधान बनाना हो, तो संसदीय कानून की आवश्यकता पड़ सकती है।

हर संधि के लिए अलग कानून आवश्यक नहीं होता। यदि संधि को मौजूदा कानून और कार्यपालिका की उपलब्ध शक्तियों के अंतर्गत लागू किया जा सकता है, तो नया कानून आवश्यक नहीं हो सकता।

उदाहरण

पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 को वर्ष 1972 के स्टॉकहोम मानव पर्यावरण सम्मेलन में लिए गए निर्णयों को लागू करने के लिए अनुच्छेद 253 के अंतर्गत संसद द्वारा बनाया गया था। पर्यावरण राज्य सूची से संबंधित विषयों को प्रभावित कर सकता था, फिर भी इसके लिए राज्यों की सहमति आवश्यक नहीं थी।

अतः सही उत्तर किसी भी राज्य की सहमति के बिना है।

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