JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2013

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

संसदीय लोक लेखा समिति

  1. लोक सभा के अधिकतम 25 सदस्यों से गठित होती है।

  2. सरकार के विनियोग लेखाओं और वित्त लेखाओं की संवीक्षा करती है।

  3. भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट की जाँच करती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

केवल 2 और 3

C.

केवल 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: B

Detailed Solution

  • कथन 1 गलत है। लोक लेखा समिति में अधिकतम 22 सदस्य होते हैं, न कि लोकसभा के 25 सदस्य।

इसके 22 सदस्यों में:

  • 15 सदस्य लोकसभा से चुने जाते हैं।

  • 7 सदस्य राज्यसभा से चुने जाते हैं।

सदस्यों का निर्वाचन प्रतिवर्ष आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाता है। इससे विभिन्न राजनीतिक दलों को उनकी सदन में सदस्य-संख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व प्राप्त होता है।

  • कथन 2 सही है। लोक लेखा समिति संघ सरकार के विनियोग लेखाओं और वित्त लेखाओं की संवीक्षा करती है।

विनियोग लेखे यह बताते हैं कि संसद द्वारा किसी विशेष सेवा या प्रयोजन के लिए स्वीकृत धन में से वास्तव में कितना व्यय किया गया। समिति यह जाँचती है कि:

  • व्यय के लिए धन विधिपूर्वक उपलब्ध था।

  • धन उसी उद्देश्य पर खर्च हुआ जिसके लिए संसद ने उसे स्वीकृत किया था।

  • व्यय सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत सीमा के भीतर था।

  • पुनर्विनियोग निर्धारित नियमों के अनुसार किया गया था।

  • अनुदान से अधिक हुए व्यय को संसद के समक्ष नियमितीकरण के लिए प्रस्तुत किया गया।

वित्त लेखे किसी वित्तीय वर्ष में सरकार की प्राप्तियों, व्यय, परिसंपत्तियों और देनदारियों का व्यापक विवरण प्रस्तुत करते हैं।

  • कथन 3 सही है। लोक लेखा समिति भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा संसद के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्टों की जाँच करती है।

समिति CAG की रिपोर्टों के आधार पर वित्तीय अनियमितता, अपव्यय, असावधानी, भ्रष्टाचार, नियमों के उल्लंघन और सार्वजनिक धन के अप्रभावी उपयोग से संबंधित मामलों की जाँच कर सकती है। CAG समिति को तकनीकी और लेखापरीक्षा संबंधी सहायता प्रदान करता है।

समिति की संरचना और कार्यप्रणाली

  • समिति का कार्यकाल एक वर्ष होता है।

  • किसी मंत्री को इसका सदस्य नहीं चुना जा सकता।

  • यदि कोई सदस्य मंत्री नियुक्त हो जाता है, तो वह समिति का सदस्य नहीं रहता।

  • समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष करता है।

  • वर्ष 1967 से सामान्यतः समिति का अध्यक्ष विपक्ष के किसी सदस्य को नियुक्त करने की परम्परा रही है।

  • समिति की रिपोर्ट और सिफारिशें सलाहकारी होती हैं; वह स्वयं प्रशासनिक कार्रवाई या दंड नहीं देती।

लोक लेखा समिति की प्रकृति

लोक लेखा समिति मुख्यतः व्यय किए जाने के बाद उसकी जाँच करती है। इसलिए इसकी जाँच को प्रायः व्यय का पश्चात् परीक्षण कहा जाता है। यह सामान्यतः संसद द्वारा स्वीकृत नीति की उपयुक्तता पर प्रश्न नहीं उठाती, बल्कि यह देखती है कि उस नीति को लागू करते समय धन विधिपूर्वक, विवेकपूर्ण और मितव्ययितापूर्वक खर्च किया गया या नहीं।

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