Previous Year Question
भारत में अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
भारत के संविधान में अविश्वास प्रस्ताव का कोई उल्लेख नहीं है।
अविश्वास प्रस्ताव केवल लोक सभा में ही पुरःस्थापित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: C
Detailed Solution
कथन 1 सही है। संविधान में ‘अविश्वास प्रस्ताव’ शब्द का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया है। इसका संवैधानिक आधार अनुच्छेद 75(3) में निहित सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत है। इसके अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
कथन 2 सही है। अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है, क्योंकि संघ की मंत्रिपरिषद राज्यसभा के प्रति नहीं, बल्कि लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया का प्रावधान लोकसभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों के नियम 198 में किया गया है।
कोई भी लोकसभा सदस्य अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति माँग सकता है।
प्रस्ताव में सरकार के विरुद्ध आरोपों या अविश्वास के कारणों का उल्लेख करना अनिवार्य नहीं है।
अध्यक्ष द्वारा प्रस्ताव को सदन में पढ़े जाने के बाद कम-से-कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है।
आवश्यक समर्थन मिलने पर अध्यक्ष प्रस्ताव पर चर्चा के लिए दिन निर्धारित करता है।
नियम 198 के अनुसार अनुमति दिए जाने के दस दिनों के भीतर प्रस्ताव को विचार के लिए लिया जाना चाहिए।
प्रस्ताव साधारण बहुमत अर्थात उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से पारित होता है।
प्रस्ताव पारित होने का प्रभाव
अविश्वास प्रस्ताव किसी एक मंत्री के विरुद्ध नहीं, बल्कि संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध होता है। यदि लोकसभा इसे पारित कर देती है, तो यह सिद्ध हो जाता है कि मंत्रिपरिषद ने सदन का विश्वास खो दिया है। सामूहिक उत्तरदायित्व के कारण प्रधानमंत्री सहित पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
अविश्वास और निंदा प्रस्ताव में अंतर
अविश्वास प्रस्ताव में विशिष्ट कारण देना आवश्यक नहीं है; निंदा प्रस्ताव में सरकार की किसी विशेष नीति या कार्रवाई के कारण बताए जाते हैं।
अविश्वास प्रस्ताव केवल संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध होता है; निंदा प्रस्ताव किसी एक मंत्री, मंत्रियों के समूह अथवा पूरी मंत्रिपरिषद के विरुद्ध हो सकता है।
अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने पर सरकार का पद पर बने रहना संभव नहीं होता।
राज्यसभा सरकार की नीतियों पर चर्चा या आलोचना कर सकती है, लेकिन वह मंत्रिपरिषद को अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से पद से नहीं हटा सकती।