Previous Year Question
जब किसी विधेयक को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में निर्दिष्ट किया जाता है, तो उसे किस प्रकार पारित करना होता है?
उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत द्वारा
उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के तीन-चौथाई बहुमत द्वारा
सदनों के दो-तिहाई बहुमत द्वारा
सदनों के पूर्ण बहुमत द्वारा
Correct Answer: A
Detailed Solution
संविधान के अनुच्छेद 108(4) के अनुसार संसद की संयुक्त बैठक में विधेयक दोनों सदनों के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाता है। इसका अर्थ साधारण बहुमत है।
बहुमत की गणना लोकसभा और राज्यसभा के उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों की संयुक्त संख्या के आधार पर होती है।
दोनों सदनों में अलग-अलग बहुमत प्राप्त करना आवश्यक नहीं होता।
मतदान में अनुपस्थित रहने वाले या उपस्थित होकर मतदान नहीं करने वाले सदस्य बहुमत की गणना में शामिल नहीं होते।
संयुक्त बैठक की अध्यक्षता सामान्यतः लोकसभा अध्यक्ष करता है। उसकी अनुपस्थिति में लोकसभा उपाध्यक्ष तथा उसके भी अनुपस्थित होने पर राज्यसभा का उपसभापति अध्यक्षता करता है।
राष्ट्रपति निम्नलिखित गतिरोधों की स्थिति में संयुक्त बैठक बुला सकता है:
एक सदन द्वारा पारित विधेयक को दूसरे सदन ने अस्वीकार कर दिया हो।
विधेयक में किए जाने वाले संशोधनों पर दोनों सदन अंतिम रूप से असहमत हों।
दूसरे सदन को विधेयक प्राप्त होने के बाद छह महीने से अधिक समय तक वह पारित न हुआ हो।
अपवाद: धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक नहीं हो सकती। धन विधेयक के लिए अनुच्छेद 109 की विशेष प्रक्रिया लागू होती है, जबकि संविधान संशोधन विधेयक को अनुच्छेद 368 के अनुसार प्रत्येक सदन द्वारा अलग-अलग आवश्यक विशेष बहुमत से पारित करना होता है।
भारत में अब तक तीन विधेयकों पर संयुक्त बैठक हुई है—दहेज प्रतिषेध विधेयक, 1961; बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक, 1977 और आतंकवाद निवारण विधेयक, 2002।