Previous Year Question
भारत की संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : गैर-सरकारी विधेयक वह विधेयक है जो संसद के ऐसे सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया जाता है जो निर्वाचित नहीं है किंतु केवल भारत के राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्दिष्ट है।
हाल ही में, भारत की संसद के इतिहास में पहली बार किसी गैर-सरकारी विधेयक को पारित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन 1 गलत है। गैर-सरकारी सदस्य विधेयक अथवा Private Member’s Bill वह विधेयक है जिसे संसद का ऐसा सदस्य प्रस्तुत करता है जो मंत्री नहीं है।
इसकी पहचान सदस्य के निर्वाचित अथवा राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्दिष्ट होने के आधार पर नहीं होती। इसलिए निर्वाचित और नामनिर्दिष्ट—दोनों प्रकार के सांसद गैर-सरकारी सदस्य हो सकते हैं, बशर्ते वे मंत्रिपरिषद के सदस्य न हों।
इसके विपरीत:
किसी मंत्री द्वारा प्रस्तुत विधेयक सरकारी विधेयक कहलाता है।
मंत्री के अतिरिक्त किसी सांसद द्वारा प्रस्तुत विधेयक गैर-सरकारी सदस्य विधेयक कहलाता है।
कथन 2 भी गलत है। गैर-सरकारी सदस्य विधेयक का संसद द्वारा पारित होना भारत के संसदीय इतिहास में पहली घटना नहीं थी। संसद के आधिकारिक विवरण के अनुसार 14 गैर-सरकारी सदस्य विधेयक अधिनियम बन चुके थे, जिनमें से पाँच राज्य सभा के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत किए गए थे।
वर्ष 2015 में तिरुचि शिवा द्वारा प्रस्तुत Rights of Transgender Persons Bill, 2014 राज्य सभा ने सर्वसम्मति से पारित किया था। यह 36 वर्षों से अधिक समय के बाद राज्य सभा द्वारा पारित कोई गैर-सरकारी सदस्य विधेयक था, लेकिन:
यह भारतीय संसद के इतिहास का पहला पारित गैर-सरकारी विधेयक नहीं था;
इसे लोक सभा ने पारित नहीं किया था; और
इसलिए यह उस रूप में संसद द्वारा पारित अधिनियम नहीं बना।
गैर-सरकारी सदस्य विधेयक भी सामान्य विधेयक की तरह दोनों सदनों द्वारा पारित होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही अधिनियम बनता है। इसके द्वारा नया कानून बनाने, वर्तमान कानून में संशोधन करने अथवा संविधान में संशोधन प्रस्तावित करने का प्रयास किया जा सकता है।