JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2018

Previous Year Question

भारत की संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सी संसदीय समिति इस बात की संवीक्षा करती है और सदन को प्रतिवेदन करती है कि क्या संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रत्यायोजित विनियमों, नियमों, उप-नियमों, उप-विधियों आदि को बनाने की शक्तियों का कार्यपालिका द्वारा ऐसे प्रत्यायोजन की परिधि के भीतर उचित प्रयोग हो रहा है?

A.

सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति

B.

अधीनस्थ विधान संबंधी समिति

C.

नियम समिति

D.

कार्य मंत्रणा समिति

Correct Answer: B

Detailed Solution

अधीनस्थ विधान संबंधी समिति इस बात की संवीक्षा करती है कि संविधान द्वारा प्रदत्त अथवा संसद द्वारा प्रत्यायोजित नियम, विनियम, उप-नियम, उप-विधियाँ और आदेश बनाने की शक्ति का कार्यपालिका द्वारा उचित प्रयोग किया जा रहा है या नहीं।

संसद मूल या प्रधान अधिनियम बनाती है, लेकिन प्रशासनिक और तकनीकी विवरण तैयार करने की शक्ति प्रायः कार्यपालिका को सौंप देती है। कार्यपालिका द्वारा इस प्रत्यायोजित शक्ति से बनाए गए नियमों तथा विनियमों को अधीनस्थ या प्रत्यायोजित विधान कहा जाता है।

समिति मुख्यतः यह जाँचती है कि अधीनस्थ विधान:

  • संविधान तथा मूल अधिनियम के अनुरूप है या नहीं;

  • संसद द्वारा प्रदान की गई शक्ति की सीमा से बाहर तो नहीं जाता;

  • ऐसा कर अथवा वित्तीय भार तो नहीं लगाता जिसकी मूल अधिनियम में अनुमति नहीं है;

  • बिना स्पष्ट वैधानिक प्राधिकार के भूतलक्षी प्रभाव तो नहीं देता;

  • न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र को अनुचित रूप से प्रतिबंधित तो नहीं करता;

  • किसी ऐसे विषय को तो शामिल नहीं करता जिसे स्वयं संसद के अधिनियम में रखा जाना चाहिए था;

  • उसके प्रकाशन अथवा संसद के समक्ष रखे जाने में अनुचित विलंब तो नहीं हुआ।

लोक सभा और राज्य सभा की अपनी-अपनी अधीनस्थ विधान संबंधी समितियाँ हैं। प्रत्येक समिति में सामान्यतः 15 सदस्य होते हैं। कोई मंत्री इसका सदस्य नहीं हो सकता, क्योंकि समिति का उद्देश्य कार्यपालिका द्वारा बनाई गई अधीनस्थ विधियों की संसदीय जाँच करना है।

अन्य विकल्पों के कार्य अलग हैं:

  • सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति: मंत्रियों द्वारा सदन में दिए गए आश्वासनों, वचनों और उपक्रमों के क्रियान्वयन की जाँच करती है।

  • नियम समिति: सदन की प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन के नियमों पर विचार करती है और आवश्यक संशोधनों की सिफारिश करती है।

  • कार्य मंत्रणा समिति: सदन के विभिन्न सरकारी तथा अन्य कार्यों के लिए समय आवंटित करने की सिफारिश करती है।

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